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साधु-संतों ने लिया निर्णय : खाक चौक में अब महिलाएं नहीं बन सकेंगी महंत

Fri, 11 Feb 2022 01:28 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

बृहस्पतिवार को अष्टावक्र शिविर में हुई खाक चौक व्यवस्था समिति की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। महंत शशिकांत दास को समिति का नया कोषाध्यक्ष चुना गया। समिति के पदाधिकारियों ने अगले वर्ष-2023 के माघ मेला के लिए 19 दिसंबर 2022 को भूमि आवंटित करने की तिथि तय की।  
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माघ मेले में खाक चौक प्रबंधन समिति की बैठक में मौजूद साधु-संत। - फोटो : प्रयागराज।
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विस्तार
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माघ मेला में 270 से अधिक साधु-संतों को बसाने वाली आध्यात्मिक संस्था खाक चौक व्यवस्था समिति ने बृहस्पतिवार को किसी महिला को महंत के रूप में स्वीकार न करने का निर्णय लिया गया। समिति की बैठक में तय हुआ कि किसी भी महिला साध्वी को उत्तराधिकारी के तौर पर महंत के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में ब्रह्मलीन हुए कुछ संतों के उत्तराधिकारी के तौर पर महिला साध्वियों ने दावा जाताया था। साथ ही त्रिवेणी बांध पर स्थित गायत्री यज्ञशाला को कब्जा मुक्त कराने के लिए शनिवार को धरना-प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया गया। 

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बृहस्पतिवार को अष्टावक्र शिविर में हुई खाक चौक व्यवस्था समिति की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। महंत शशिकांत दास को समिति का नया कोषाध्यक्ष चुना गया। समिति के पदाधिकारियों ने अगले वर्ष-2023 के माघ मेला के लिए 19 दिसंबर 2022 को भूमि आवंटित करने की तिथि तय की।  

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खाक चौक में बनाए जाएंगे पांच रामानंदाचार्य प्रवेश द्वार

इसके अलावा खाकचौक में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के नाम पर पांच भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाने पर भी सहमति व्यक्त की गई। तय हुआ कि समिति का अगला चुनाव -2025 में कराया जाएगा। समिति में सक्रिय न रहने के कारण महंत रामेश्वर दास काशी को बहिष्कृत करने का भी निर्णय लिया गया। उन्हें मेले में भूमि आवंटित की जाए या नहीं इस पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।



इसी तरह खाकचौक में किसी महिला को महंत के रूप में स्वीकार न करने का भी निर्णय लिया गया। संतों ने त्रिवेणी बांध स्थित गायत्री यज्ञशाला को कब्जा मुक्त करवाने के लिए 12 फरवरी को धरना प्रदर्शन करने का भी एलान किया। समिति के महामंत्री महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआबाबा ने संचालन किया। अध्यक्षता रूप नारायण दास ने की। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष महंत दामोदर दास, महंत जगतराम दास, महंत अविराम दास, महंत गोपाल दास महाराज, महंत भूषण दास, महामंडलेश्वर हिटलर बाबा समेत कई संत मौजूद रहे।
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