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यूपीपीएससी: अंतिम अवसर वालों को झटका देगा 13 का चक्कर

Wed, 08 Jan 2020 03:05 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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The round of 13 will shock the last chancers
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पीसीएस परीक्षा में आयु सीमा एवं अवसर में कटौती न किए जाने को लेकर तो स्थिति स्पष्ट कर दी लेकिन, प्रारंभिक परीक्षा में पूर्व की भांति पदों के मुकाबले 18 गुना अभ्यर्थियों को पास किए जाने की मांग को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं कर सका। प्रतियोगी छात्रों का आरोप हैं कि आयोग ने अपना समय और खर्चा बचाने के लिए एक प्रयोग किया, जो अभ्यर्थियों पर भारी पड़ेगा और इससे सबसे अधिक नुकसान उन अभ्यर्थियों को होने जो रहा है, जिनका अंतिम अवसर है।

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पीसीएस में अब तक प्रारंभिक परीक्षा में पदों की संख्या के मुकाबले मुख्य परीक्षा के लिए 18 गुना अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण किया जाता था लेकिन, पीसीएस-2019 से आयोग ने नियम बदल दिए हैं और इस बार प्रारंभिक परीक्षा में पदों के मुकाबले महज 13 गुना अभ्यर्थियों को ही उत्तीर्ण किया जाएगा। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा 15 दिसंबर को हो चुकी है। इस बीच अभ्यर्थियों ने इस बदलाव के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस बदलाव से सिर्फ आयोग को फायदा होगा और नुकसान केवल अभ्यर्थियों को होगा।

उत्तर प्रदेश प्रतियोगी छात्र मंच के प्रतिनिधि संदीप सिंह ने सोमवार को आयोग के सचिव से वार्ता के दौरान यह मुद्दा उठाया था। सचिव ने कहा था कि इस पर आयोग ने निर्णय लिया है। वह अभ्यर्थियों का प्रत्यावेदन आयोग के समक्ष रखेंगे। संदीप एवं अन्य प्रतियोगी छात्रों ने सवाल उठाए हैं कि जब अंतिम चयन में मेंस और इंटरव्यू के अंक जुड़ते हैं तो प्रारंभिक परीक्षा में अभ्यर्थियों की इतने बड़े पैमाने पर छंटनी क्यों की जा रही है? पिछली परीक्षाओं के मुकाबले इस बार पदों की संख्या काफी कम हो गई है। ऐसे में प्रारंभिक परीक्षा में छांटे जाने वाले अभ्यर्थियों का अनुपात और बढ़ जाएगा।
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उन अभ्यर्थियों को सबसे अधिक नुकसान होगा, जो इस परीक्षा में निर्धारित आयु सीमा पूरी करने के कारण अंतिम बार शामिल हो रहे हैं। इनमें तमाम अभ्यर्थी ऐसे हैं, जो पिछली परीक्षा में लगातार मेंस और इंटरव्यू में शामिल होते रहे हैं लेकिन अंतिम रूप से चयनित नहीं हो सके। ऐसे अभ्यर्थी अपनी योग्यता के दम पर ही इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन पीसीएस-प्री 2019 में आयोग ने उनके सामने भी मुश्किल खड़ी कर दी है। इससे फायदा केवल आयोग को होगा।

मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या के साथ कॉपियों की संख्या भी कम हो जाएगी। कम केंद्र बनाए जाएंगे। कॉपियां जांचने वाले परीक्षकों की संख्या भी कम होगी। इस व्यवस्था के लागू होने से आयोग का खर्च बचेगा और समय तो बचेगा मगर, अभ्यर्थियों के लिए सिर्फ मुश्किलें बढ़ेंगी। प्रतियोगी छात्रों ने मांग की है कि आयोग के अध्यक्ष को अपनी इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि प्रतियोगियों के भविष्य से खिलवाड़ न हो।

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