इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महानिबंधक को निर्देश दिया कि वह मुकदमों को सूचीबद्ध करने के लिए दिए जाने वाले आवेदनों की लिस्टिंग में हो रही गड़बड़ी की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि लिस्टिंग के प्रार्थना पत्र उन पीठों को भेज दिए जा रहे हैं, जिन्हें उस याचिका पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने नरेंद्र चंचल जैन एवं अन्य की याचिका पर दिया। कोर्ट ने सुनवाई के लिए 12 मार्च की तिथि नियत की है।
बेंच सेक्रेटरी ने कोर्ट को बताया कि याचिका की सुनवाई का क्षेत्राधिकार इसी पीठ के पास है, मगर इसकी लिस्टिंग का प्रार्थना पत्र एक अन्य पीठ में प्रस्तुत हुआ था। उक्त पीठ ने 7 मार्च 2025 को याचिका लिस्ट करने का आदेश दिया था। उक्त आदेश के अनुपालन में यह याचिका आज इस न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। कोर्ट ने कहा कि यह कैसे हुआ, जब सुनवाई का क्षेत्राधिकार इस पीठ के पास है तो मुकदमे की लिस्टिंग का प्रार्थना पत्र किसी अन्य पीठ में कैसे प्रस्तुत किया गया।
बेंच सेक्रेटरी ने कहा कि ऐसे कई मामले देखने में आ रहे हैं कि मुकदमे की लिस्टिंग का आवेदन दूसरी बेंच को भेज दिया जाता है, जिन्हें सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है। कोर्ट के आदेश के बाद मामला संबंधित न्यायालय में सूचीबद्ध किया जाता है। कोर्ट को बताया गया कि इस तरह की गड़बड़ी तभी हो सकती है, जब सॉफ्टवेयर में बेंच आईडी में परिवर्तन कर दिया जाए।
कोर्ट ने महानिबंधक को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की स्वयं जांच कर रिपोर्ट दें कि कैसे इस न्यायालय की लिस्टिंग एप्लीकेशन दूसरी बेंच को भेजी गई। कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बिना बेंच आईडी में बदलाव करना प्रथम दृष्टया न्यायिक कार्रवाई के संपादन में हस्तक्षेप है।