इलाहाबाद। दिव्य प्रेम सेवा मिशन हरिद्वार के सेवा कार्यों को समर्पित श्रीराम कथा आयोजन समिति की ओर से सेवा समिति रामबाग में आयोजित चौथे दिन बुधवार को मुनि वशिष्ठ द्वारा रजा दशरथ को राम के राज्याभिषेक की आज्ञा देने के प्रसंग की कथा सुनाई गई। कथा व्यास संत विजय कौशल ने कथा के मर्म को बतलाया। कहा कि राजा दशरथ ने बालों में सफेदी देख गुरु वशिष्ठ से सलाह लेने उनके आश्रम पहुंचे। वशिष्ठ ने उन्हें आज्ञा दी कि राम का राज्याभिषेक कर दो। राजा दशरथ ने गुरु आज्ञा पाकर राम के राज्याभिषेक की घोषणा कर दी। अयोध्या नगरी में आनंद छा गया। राम वनवास, केवट आदि प्रसंगों की कथा सुनाई।
संत विजय कौशल ने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि केवट की भक्ति अतुलनीय है। केवट भगवान राम के दर्शन पाकर गदगद हैं, पर बिना पैर धोए नाव में बैठाने को राजी नहीं हैं। भगवान राम उनकी भक्ति से रीझ पैर धुलवाने के बाद ही नाव में बैठते और उतराई में मुद्रिका देते हैं। ‘मांगी नाव न केवट आना कहा तुम्हार मरमु मैं जाना’ सुन उपस्थित लोग भावविभोर हुए।
संचालन जुगुल किशोर तिवारी ने किया। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोगियों के सहयोग को समर्पित दिव्य प्रेम सेवा मिशन हरिद्वार के कार्यों की सराहना की और इस तरह के आयोजन किए जाने की बात कही। इस अवसर पर मुख्य यजमान आर.बी चंचल, शिव नारायण, मनोजकान्त, गजेंद्र, बी.एन. सिंह, डा. ए.के. सिंह, कपुरिहा, अंशुमन, फूलचंद्र दुबे, भजन गायक प्रेमप्रकाश दुबे आदि उपस्थित रहे।
श्री श्रीउत्तर मध्य रेलवे रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित रामलीला में बुधवार को लंका विजय लीला मंचित हुई। मेघनाद सुलोचना संवाद, लक्ष्मण मेघनाद युद्ध, मेघनाद वध, सती सुलोचना, रावण का युद्व क्षेत्र में आना, रावण वध, सीता का राम के पास आना, अग्नि परीक्षा आदि प्रसंगों ने मनमोहा। निर्देशन प्रभाकर सिंह, सहनिर्देशन जीतेंद्र पांडेय ने किया। इस अवसर पर रामलीला में मंडल रेल प्रबंधक वी, के, त्रिपाठी संतलाल वर्मा, अमित मालवीय, अरविंद यादव, शिव नरेश, राघवेंद्र आदि उपस्थित रहे।