इलाहाबाद (ब्यूरो)। पहले से ही तीन सदस्यों के काम-काज पर रोक के कारण सदस्यों की कमी से परेशान उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के दो अन्य सदस्यों की नियुक्ति पर भी सवालिया निशान लग गया है। चयन बोर्ड के सदस्यों डॉ. मोहम्मद उमर और डॉ. योगेंद्र प्रजापति बेचैन की नियुक्ति मानक के विपरीत किए जाने की बात सामने आई है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में सदस्य डॉ. मोहम्मद उमर हरियाणा के एक डिग्री कॉलेज में शिक्षक हैं। चयन बोर्ड की नियमावली में कहा गया है कि सदस्य अथवा अध्यक्ष नियुक्त होने वाला प्रदेश के किसी शैक्षिक संस्थान में शिक्षक अथवा प्रशासनिक अधिकारी होना चाहिए। डॉ. उमर हरियाणा के शिक्षण संस्थान से जुड़े होने के कारण इस पद के लिए योग्य नहीं हैं। डॉ. योगेन्द्र प्रजापति बेचैन जालौन के डीएवी डिग्री कॉलेज में शिक्षक हैं।
चयन बोर्ड के सदस्य बनने से पहले उनका शैक्षिक अनुभव मात्र आठ वर्ष का ही था, जबकि दस वर्ष का अनुभव होना चाहिए। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से 2004 में चयनित डॉ. योगेंद्र प्रजापति बेचैन प्रतीक्षा सूची में थे नौ अप्रैल 2005 को उनको नियुक्ति मिली थी। सदस्यों की योग्यता पर सवाल एक अभ्यर्थी की ओर से आरटीआई से मांगी गई जानकारी में सामने आई है। आरटीआई मांगने वाले अभ्यर्थी के बार-बार जानकारी मांगने के बाद भी चयन बोर्ड उसे कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहा है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की पीजीटी परीक्षा के ओएमआर में टेपरिंग करने की शिकायत सही पाई गई है। पता चला है कि अभ्यर्थी की ओएमआर की कार्बन कॉपी में मात्र 16 सवाल किए गए हैं जबकि मूल ओएमआर में कुल 110 सवालों के हल भरे गए हैं। चयन बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनिल कुमार का कहना है कि मामला जांच की प्रक्रिया में है, सही पाए जाने पर अभ्यर्थन निरस्त कर दिया जाएगा।