मुरादाबाद थाने का एक कर्मचारी बीते 20 वर्षों से सिर्फ 600 रुपये माह पर काम कर रहा है। विभाग ने न तो उसकी पगार बढ़ाई और न ही उसे नियमित किया। हार कर कर्मचारी ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मुरादाबाद कोतवाली की ओर से 20 वर्ष से न्यूनतम मजदूरी से भी कम 600 रुपये महीने की तनख्वाह पर काम लेना एक प्रकार से बेगार कराना है। कोर्ट ने सरकारी वकील से याची की स्थिति एवं उसे किए जा रहे भुगतान का ब्योरा मांगा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने महेश की याचिका पर दिया है। याचिका में सेवा नियमित किये जाने की मांग की गई है। महेश का कहना है कि उसने कई बार अधिकारियों से वेतन बढ़ाने और नियमित करने की मांग की, मगर उसकी मांग पर कोई सुनवाई नहीं हुई। हार कर उसे कोर्ट की शरण लेनी पड़ी है।