इलाहाबाद (ब्यूरो)। सिविल सर्विसेज-2015 मुख्य परीक्षा में शनिवार को हुए सामान्य अध्ययन के पहले पेपर में ही अभ्यर्थियों की तार्किक क्षमता की परख हुई। प्राचीनतम सभ्यताओं से लेकर वर्तमान की जनसंख्या विस्फोट, लिंगानुपात, पर्यावरण आदि पर विचारात्मक सवालों के माध्यम से यह भी जानने की कोशिश की गई कि उनमें भारत तथा यहां की समस्याओं की कितनी समझ है।
संघ लोक सेवा आयोग की ओर से मुख्य परीक्षा शुक्रवार को शुरू हुई। इसी क्रम में शनिवार से सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्रों की परीक्षा शुरू हुई। बदले प्रारूप में मुख्य परीक्षा में अब सिर्फ एक वैकल्पिक विषय रह गया है। दूसरे विषय की जगह सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्रों की संख्या दो से बढ़ाकर चार कर दी गई है। ऐसे में सिविल सर्विसेज में सामान्य अध्ययन का महत्व बढ़ गया है। इसके अंतर्गत सामान्य अध्ययन के सिलेबस के अलावा पेपर पैटर्न में भी काफी बदलाव हुआ है। अब तथ्यात्मक के साथ विचारात्मक प्रश्न भी पूछे जाने लगे हैं।
ऐसे में तथ्यों की जानकारी के साथ अभ्यर्थी के सोच की भी परख होती है। पहले दिन सामान्य अध्ययन के दोनों पेपर में यह मकसद साफ दिखा। कुल 20 प्रश्न थे और इनमें से ज्यादातर में अभ्यर्थी को तार्किकता के आधार पर टिप्पणी करनी थी। एक प्रश्न था, ‘महात्मा गांधी के बिना भारत की स्वतंत्रता की उपलब्धि कितनी भिन्न हुई होती?’ इसी तरह से एक प्रश्न था, ‘समालोचनापूर्वक परीक्षण कीजिए कि क्या बढ़ती हुई जनसंख्या निर्धनता का मुख्य कारण है या कि निर्धनता जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण है।’
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2015 सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र का प्रारूप एक बार फिर बदल गया है। इस बार प्रश्नों की संख्या तो घटा दी गई, लेकिन हर प्रश्न की शब्द सीमा बढ़ा दी गई है। ऐसे में अभ्यर्थियों के सामने अधिक नंबर पाने की चुनौती भी बढ़ गई। पिछले साल पहले प्रश्न पत्र में 25 सवाल पूछे गए थे। हर प्रश्न का जवाब अधिकतम 150 शब्दों में देना था। यानी, कुल 3750 शब्द लिखने थे।
इसके विपरीत इस बार प्रश्नाें की संख्या 20 रही लेकिन उनका जवाब अधिकतम 200 शब्दों में देना था। इस तरह से कुल चार हजार शब्द लिखने थे। लोक सेवा आयोग केंद्र से परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि जानकारी है तो कम शब्द वाले अधिक प्रश्नों में ज्यादा नंबर पाए जा सकते हैं। ऐसे में नए प्रारूप में दोहरी चुनौती से जूझना पड़ा। उनका कहना था कि निर्धारित अवधि में अधिक शब्द लिखने पड़े। इसके बावजूद अपेक्षित नंबर अर्जित करना कठिन होगा।