हाईकोर्ट के सामने लगने वाले जाम से मुक्ति निजात के लिए बनने वाले फ्लाईओवर को सेना की एनओसी मिल गई है। फ्लाईओवर जीटी रोड पर करियप्पा द्वार चौराहे से सिविल लाइंस स्थित एकलव्य चौराहे तक बनना है। एनओसी के लिए सेना को साल भर पहले ही प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि अभी पीडब्ल्यूडी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्वीकृति लेनी है। उसके बाद ही निर्माण प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
इस फ्लाईओवर के निर्माण के लिए तीन साल से कवायद चल रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुंभ 2012-13 के दौरान इसकी घोषणा की थी। उसी के बाद से इसके बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। पीडब्ल्यूडी के सर्वे के बाद सेना की एनओसी जरूरी थी। इसके लिए विभाग ने प्रशासन के माध्यम से प्रस्ताव सेना मुख्यालय भेजा था। सेना ने इसकी स्वीकृति बीते हफ्ते में दी है। इसका निर्माण पीडब्ल्यूडी की सेतु निगम इकाई कराएगा।
सेतु निगम इकाई के उप परियोजना प्रबंधक एसपी बागरी ने बताया कि उनके पास अभी एनओसी का पत्र नहीं आया है। इसी हफ्ते आने की उम्मीद है। एनओसी को इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा। हाईकोर्ट की भवन समिति फ्लाई ओवर बनाए जाने के लिए अपनी मुहर लगाएगी। यह बैठक एनओसी जमा होने के बाद होगी। हाईकोर्ट की स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। निर्माण में दो साल लगेंगे। निर्माण ब्रिज कॉरपोरेशन कराएगा। शासन ने निर्माण के लिए कुल निर्धारित बजट 9020.60 लाख रुपये के मुकाबले 1353 लाख रुपये दो महीने पहले ही आवंटित किए हैं।
बाकी कल...
पुराने शहर को अभी सालों तक जाम से छुटकारा मिलने वाला नहीं है। शासन ने पानी की टंकी से पुराने शहर को जोड़ने वाले नए फ्लाईओवर के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इसके पीछे मुख्य वजह सेना द्वारा जमीन न दिया जाना बताया जाता है। शहरियों को जाम से राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नए फ्लाईओवर बनाए जाने की घोषणा की थी। उसके लिए लोक निर्माण विभाग और रेलवे की ओर से कई बार सर्वे हुआ। पीडब्ल्यूडी की ओर से किए गए सर्वे में मौजूदा फ्लाईओवर की तरह ही नए फ्लाईओवर का डिजाइन तैयार किया गया, लेकिन रेलवे ने जो डिजाइन तैयार किया उसकी ऊंचाई मौजूदा फ्लाई ओवर से डेढ़ मीटर अधिक ऊंची है।
इससे फ्लाईओवर के दोनों ओर के एप्रोच मार्ग की लंबाई बढ़ गई है। मौजूदा फ्लाई ओवर की कुल लंबाई पचास मीटर है जबकि रेलवे के डिजाइन से फ्लाई ओवर की लंबाई 75 मीटर से अधिक हो रही है। इसके चलते हाईकोर्ट पानी की टंकी की तरफ का एप्रोच सेना की जमीन पर पहुंच रहा है। पीडब्ल्यूडी ने शासन के जरिए सेना से उसके एरिया में एप्रोच बनाने के लिए स्वीकृति मांगी थी लेकिन सेना इसके लिए तैयार नहीं है। इस बात से शासन को भी अवगत कराया गया। पीडब्ल्यूडी सेतु निगम इकाई के उप परियोजना प्रबंधक एसपी बगारी ने कहा कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस फ्लाईओवर के निरस्त करने का निर्णय लिया गया है।