पहले अमित शाह की रैली और उसके बाद अगले माह राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद परेड ग्राउंड में पीएम मोदी की जनसभा। इन दोनों मौकों पर तमाम दलों के नेताओं द्वारा भाजपा ज्वाइन करने की खबर आने के बाद उन नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है जो इलाहाबाद की विभिन्न विधानसभा सीट से पार्टी का उम्मीदवार बनने का जोर शोर से प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि जो नेता अन्य दलों से भाजपा ज्वाइन करने आ रहे हैं वे विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं। सो बाहरी नेताओं की इंट्री को लेकर इन भाजपा नेताओं ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। इलाहाबाद पहुंच रहे प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य केसमक्ष तमाम नेता अपना विरोध भी दर्ज करवा सकते हैं।
वर्ष 2017 की शुरूआत में ही यूपी विधानसभा चुनाव हो सकता है। इस चुनाव को लेकर भाजपाई काफी उत्सुक हैं। खासतौर से वे भाजपाई जो यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी का उम्मीदवार बनने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तमाम नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की बेचैनी इस बात को लेकर बढ़ गई है कि सपा और बसपा के कई धुरंधर अगले कुछ दिनों में भाजपा का दामन थाम सकते हैं। दरअसल 31 मई को इलाहाबाद के अंदावा में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में किसान विराट सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस सम्मेलन में बसपा और सपा के पूर्व विधायक बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। चर्चा इस बात की भी है कि सम्मेलन की तैयारी में बसपा के एक पूर्व विधायक ने ही की है। इसके अलावा 13 जून को परेड ग्राउंड में पीएम मोदी की रैली में भी अन्य दलों के कुछ नेता बीजेपी में शामिल हो सकते हें।
विधानसभा चुनाव के पहले तमाम दलों के नेताओं द्वारा बीजेपी ज्वाइन करने की खबर से भाजपा के पुराने एवं विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी का ख्वाब देख रहे नेता खासे परेशान है। इन नेताओं को इस बात की चिंता है कि अगर बाहरी दल के नेता भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं तो उसमें से कुछ को विधानसभा का टिकट मिल सकता है। सो इन नेताओं एवं पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गुप्त रूप से मीटिंग भी करनी शुरू कर दी है। चर्चा इस बात की है कि ये नेता बाहरी नेताओं को टिकट न दिए जाने की डिमांड पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एवं प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य से कर सकते हैं। केशव सोमवार को इलाहाबाद भी पहुंच रहे हैं। इस बारे में भाजपा नेता डॉ. एलएस ओझा का कहना है कि मोदी सरकार की विकास नीति के मद्देनजर ही विपक्षी दलों के नेताओं का भाजपा की ओर झुकाव हो रहा है। अगर कोई भाजपा में शामिल हो रहा है तो उसका स्वागत करना चाहिए।