मेडिकल स्टूडेंटस को मिली सौगात
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए नई सूची जारी कर दी गई है। नई सूची में प्रांतीय चिकित्सा सेवा (पीएमएस) से जुड़े अभ्यर्थियों की संख्या बहुतायत हो गई है, जबकि फ्रेश अभ्यर्थियों की संख्या टॉप-200 में मात्र 19 रह गई है। प्रवेश परीक्षा को टॉप करने वाले अभ्यर्थी का नई सूची में 121वां स्थान है। इसके चलते एमबीबीएस करने के बाद सीधे प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों (फ्रेश) को तगड़ा झटका लगा है। अभ्यर्थियों में इसको लेकर आक्रोश भी है। वह इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की तैयारी में है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका फिर दाखिल की गई है।
अभी तक पीएमएस संवर्ग के अभ्यर्थियों मेडिकल कॉलेजों की पीजी प्रवेश में तीस फीसदी सीटें आरक्षित थीं। यह आरक्षण उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के कारण दिया गया था। इस बार पीजी प्रवेश परीक्षा में आवेदन करने वाले पीएमएस के कुछ ऐसे अभ्यर्थी शामिल हुुए जिन्होंने ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवाएं नहीं दी। इसके कारण उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया। पीएमएस के ऐसे अभ्यर्थियों ने आरक्षण दिए जाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उनका तर्क था कि नियुक्ति का अधिकार सरकार के पास है। सरकार ने उनकी नियुक्ति ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।
प्रीम कोर्ट ने इस संबंध में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) और प्रदेश सरकार का रुख जानने के बाद तीस फीसदी तक ग्रेस मार्क दिए जाने और पीजी प्रवेश परीक्षा के लिए जारी की गई मेरिट को निरस्त कर फिर से मेरिट सूची जारी कर प्रवेश लेने फैसला सुना दिया। प्रदेश सरकार ने फैसले के बाद अब नई मेरिट लिस्ट बनाई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक नई मेरिट में एमबीबीएस के बाद पीजी प्रवेश परीक्षा में शामिल होने वालों की संख्या टॉप-200 में मात्र 19 रह गई है। बाकी सभी पर पीएमएस संवर्ग के अभ्यर्थी हैं। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में भी पीजी की 61 सीटों में तीस सीटें ऑल इंडिया के लिए आरक्षित हैं, जबकि बची 31 सीटों पर पीएमएस संवर्ग के अभ्यर्थियों का ही प्रवेश होगा। फ्रेश अभ्यर्थी हैं ही नहीं। इसको लेकर उनमें आक्रोश है। कई अभ्यर्थियों ने कहा वह अपने हक के लिए आंदोलन करेंगे।
उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में पीजी में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा मार्च में ही आयोजित हुई थी। उसके बाद मेरिट सूची भी जारी कर दी गई। मेरिट सूची के आधार पर प्रवेश भी हो चुका है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मेरिट सूची को दोबारा बनाया गया है।