पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने के बाद जान गंवाने वाले जिले के 74 शिक्षकों और कर्मचारियों के परिजनों को कैबिनेट के फैसले से बड़ी राहत मिली है। कर्मचारियों को मिलने वाले मुआवजे और राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन की विसंगतियों का मुद्दा अमर उजाला में लगातार उठाया जाता रहा। अब गाइडलाइन में संशोधन फैसला लिया गया है। इससे शिक्षकों और कर्मचारियों की मुआवजे की उम्मीद जगी है। हालांकि , इनमें से कितने परिवार मुआवजा के हकदार होंगे यह नई गाइडलाइन जारी होने तथा स्क्रीनिंग के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
चुनावी ड्यूटी के दौरान निधन पर कर्मचारी के परिजन को 30 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। पंचायत चुनाव के बाद निर्वाचन आयोग ने इस प्रावधान के तहत मृतक कर्मचारियों की सूची मांगी थी। कोविड संक्रमण से जिनकी मौत हुई थी उनका डिटेल भी मांगा गया था। जिले में अलग-अलग विभाग के 74 शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है।
इनमें से 44 तो माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा के अध्यापक शामिल हैं। सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के चुनावी ड्यूटी, कोविड पॉजिटिव होने से संबंधित सर्टिफिकेट तथा मृत्यु प्रमाणपत्र आदि डिटेल भी मांगे गए थे। इनमें से 42 शिक्षकों और कर्मचारियों ने सभी दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए हैं लेकिन एक प्रावधान की वजह से किसी को पात्र नहीं पाया गया। निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार चुनावी ड्यूटी के दौरान निधन पर ही लाभ मिलेगा। आयोग ने चुनावी ड्यूटी की अवधि भी परिभाषित कर रखी है। इसके विपरीत चुनावी ड्यूटी के दौरान संक्रमित कर्मचारियों की बाद में मृत्यु हुई थी। इसकी वजह से किसी को भी इस लाभ का हकदार नहीं पाया गया।
आयोग की गाइडलाइन की इस विसगंति को अमर उजाला में लगातार प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारियों तथा परिजनों की मांग थी कि चुनावी ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने वाले हर कर्मचारी के परिजन को मुआवजा मिलना चाहिए। उनकी मृत्यु चाहे जब हुई हो। कर्मचारियों की इस मांग को भी अमर उजाला में प्रमुखता से उठाया गया। अब सरकार ने उनकी मांग मान ली है और चुनावी ड्यूटी के बाद 30 दिन के भीतर निधन पर मुआवजा दिए की घोषणा की है। इससे पीड़ित शिक्षकों और कर्मचारियों के परिजनों में राहत की उम्मीद जगी है। शिक्षक एवं कर्मचारी नेताओं ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।
अधिक मुआवजे की मांग
चुनावी ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने के बाद जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को मुआवजा दिए जाने संबंधित सरकार की नई घोषणा का संगठनों ने स्वागत किया है लेकिन उन्होंने मुआवजे की राशि को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि मुआवजे की राशि कम से कम 50 लाख रुपये होनी चाहिए।
ठीक होने वालों के लिए भी मुआवजे की मांग
चुनावी ड्यूटी के दौरान 100 से अधिक शिक्षक और कर्मचारी संक्रमित हो गए थे। इनके संपर्क में आने के बाद परिवार के कई सदस्य भी पॉजिटिव हो गए। 74 शिक्षकों और कर्मचारियों को छोडक़र अन्य ठीक हो गए लेकिन इनके इलाज पर लाखों रुपये खर्च हो गए। राज्य कर्मचारी महासंघ के कार्यकारी जिलाध्यक्ष राजेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि उन दिनों सरकारी अस्पतालों में बेड खाली नहीं थे। इसकी वजह से उन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती होने पड़ा। ऐसे में ज्यादातर कर्मचारियों के इलाज पर पांच से 10 लाख खर्च हो गए। उनका यह भी कहना है कि इलाज के बाद कर्मचारी तो ठीक हो गए लेकिन कई के परिवार के सदस्य का निधन हो गया। उनका कहना है कि सरकार को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने ऐसे कर्मचारियों के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की।
गाइडलाइन को लेकर अब भी बने हैं सवाल
सरकार ने निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन में संशोधन का तो आदेश दिया है लेकिन सवाल अब भी बने हुए हैं। नेताओं का कहना है कि चुनावी ड्यूटी के बाद लौटे कई कर्मचारियों में लक्षण दिखने में दो से तीन दिन लग गए। इसके बाद उन्होंने जांच कराने में भी देरी की। ऐसे में इस पर सवाल बना हुआ है कि संक्रमित होने की अवधि को किस तरह से परिभाषित किया गया है। ऐसे में उन्हें नई गाइडलाइन का इंतजार है।