मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने बेटियों की निर्मम हत्या के आरोप में पिता अवधेश को ही आरोपी बना कर गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन ट्रायल के दौरान गवाहों के बयान के आधार पर जिला सत्र न्यायालय ने राजेंद्र कुमार और नर्वेश को तिहरे हत्याकांड का दोषी पाया।
कोर्ट ने राजेंद्र और नर्वेश को फांसी की सजा सुनाई, जबकि हमलावर छुटकन्नू की ट्रायल के दौरान वर्ष 2010 में मौत हो चुकी थी। फांसी की सजा की पुष्टि के लिए ट्रायल कोर्ट की ओर से भेजे गए संदर्भ पर हाईकोर्ट ने दोनों को मिली फांसी को बीस वर्ष की उम्रकैद में तब्दील कर दिया।
75 वर्ष का हो गया राजेंद्र , 50 के नर्वेश...छुटकन्नु की मौत, विवेचना लापता
इस बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड में जेल में सजा काट रहे राजेंद्र की उम्र अब 75 वर्ष है, जबकि नर्वेश 50 वर्ष का हो चुका है। वहीं ट्रायल के दौरान छुटकन्नू की वर्ष 2010 में मौत हो चुकी थी। जबकि मृत बेटियों के निर्दोष पिता अवधेश को मुल्जिम बनाने वाले विवेचक होशियार सिंह के खिलाफ ट्रायल कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी किया था, लेकिन वह लापता है।