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मदर्स डे पर मां को किया नमन

Mon, 11 May 2015 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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इलाहाबाद। मदर्स डे पर रविवार को विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से विविध कार्यक्रमों के माध्यम से मां को नमन किया गया। प्रयाग राज सेवा समिति की ओर से दशाश्वमेघ घाट पर ‘जिनके चरणों में चारों धाम, पूरा जीवन मां के नाम’ कार्यक्रम की शुरुआत पूजन-अर्चन के साथ हुई। संस्था सचिव तीर्थराज ने कार्यक्रम में उपस्थिति पांच माताओं रेखा अग्रवाल, जय माला पांडेय, निवेदिता कौल, आशा पांडेय, राजेश्वरी पांडेय जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला। इसके बाद सभी मांओ को स्मृति चिन्ह, प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
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राकेश श्रीवास्तव के निर्देशन में मोहित डांस ग्रुप के बच्चों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी। गायिका आंचल अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत ‘ओ मां ओ मां तू कितनी अच्छी है’ गीत को सुन सभी भाव विभोर हो गए। इस दौरान नदियों में बढ़ रहे प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की गई। युवा कवि विष्णु दयाल श्रीवास्तव ने मां पर केंद्रित रचनाओं के माध्यम से धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम में केसी पांडेय, गुरु दयाल श्रीवास्तव, अरुण शुक्ला, पुष्पराज पांडेय, अनुपमा पांडेय आदि मौजूद रहे।
बचपन प्ले स्कूल अल्लापुर की ओर से मदर्स डे पर रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। बच्चों ने अपने हाथों से बनाए कार्ड अपनी मम्मियों को दिए। मम्मियों के लिए पासिंग द बॉल, शो योर टैलेंट आदि खेल हुए। इस दौरान विभिन्न चरणों में मदर ऑफ द डे- मधुलिका, निशा मौर्या, मधु सिंह, मोस्ट एक्टिव मदर- दिपाली, रिम्मी त्रिपाठी, काजल श्रीवास्तव और मोस्ट स्माइल मदर सुषमा कैथवास, अल्का मिश्रा और बिंदु श्रीवास्तव को चुना गया। निदेशक संगीता यादव ने सभी विजेताओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन श्वेता श्रीवास्तव ने किया। डायोसिस ऑफ लखनऊ की इलाहाबाद डीनरी के द्वारा सेंट पॉल चर्च में महिलाओं को सम्मानित किया गया। रेव्ह एसपी लाल ने विशेष प्रार्थना के बाद सम्मानित किया।
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कविता --
मम्मी
लेती नहीं दवाई मम्मी, जोड़े पाई-पाई मम्मी।
दुख थे पर्वत, राई मम्मी, हारी नहीं लड़ाई मम्मी।
इस दुनिया में सब मैले हैं, किस दुनिया से आई मम्मी।
दुनिया के सब रिश्ते ठंडे, गरमागर्म रजाई मम्मी।
जब भी कोई रिश्ता उधड़े, करती है तुरपाई मम्मी।
बाबू जी तनखा लाये बस, लेकिन बरकत लाई मम्मी।
बाबूजी सख्त मगर, माखन और मलाई मम्मी।
बाबू जी के पांव दबाकर, सब तीरथ हो आई मम्मी।
नाम सभी है गुड़ से मीठे, मांजी, मैया, माई मम्मी।
सभी साड़ियां छीज गई थी, मगर नहीं कह पाई मम्मी।
मम्मी से थोड़ी-थोड़ी सबने, रोज चुराई मम्मी।
घर में चूल्हे मत बांटो रे, देती रही दुहाई मम्मी।
बाबू जी बीमार पड़े जब, साथ-साथ मुरझाई मम्मी।
रोती है लेकिन छुप-छुपकर, बड़े सब्र की जाई मम्मी।
लड़ते-लड़ते, सहते-सहते, रह गई एक तिहाई मम्मी।
बेटी की ससुराल रहे खुश, सब जेवर दे आई मम्मी।
मम्मी से घर, घर लगता है, घर में घुली समाई मम्मी।
बेटे की कुर्सी है ऊंची, पर उसकी ऊंचाई मम्मी।
दर्द बड़ा हो या छोटा हो, याद हमेशा आई मम्मी।
घर के शगुन सभी मम्मी से, है घर की शहनाई मम्मी।
सब पराए हो जाते हैं, होती नहीं पराई मम्मी ।
           - मां का लाडला
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