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अब ‘मनी’ से मन टटोलने की कोशिश

Sun, 21 Feb 2016 11:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
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पंचायत चुनाव तो बीत गए लेकिन चुनाव में लेनदेन का सिलसिला अभी थमा नहीं है। अब विधान परिषद के लिए स्थानीय प्राधिकारी चुनाव की बारी है। मैदान में कुल तीन प्रत्याशी हैं। इनमें से कोई एक ही चुनाव जीतेगा। जिस प्रत्याशी को सर्वाधिक क्षेत्र पंचायत सदस्यों (बीडीसी), ग्राम प्रधानों एवं अन्य स्थानीय निकायों से निर्वाचित सदस्यों का समर्थन मिलेगा, विधान परिषद तक वही पहुंचेगा। इसके लिए तीन मार्च को मतदान होगा और छह मार्च को परिणाम सामने आ जाएंगे।
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 स्थानीय प्राधिकारी के चुनाव में बीडीसी सदस्य, ग्राम प्रधान, कैंट बोर्ड के निर्वाचित एवं नामित सदस्य, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत के निर्वाचित सदस्य, सांसद, विधायक एवं एमएलसी मतदान कर सकते हैं। सांसदों, विधायकों की संख्या गिनी चुनी होती है, सो बीडीसी सदस्यों, ग्राम प्रधानों एवं अन्य निकायों के निर्वाचित सदस्यों के वोट ही निर्णायक माने जाते हैं। हालांकि इस बार के चुनाव में नव निर्वाचित बीडीसी सदस्य मतदान नहीं कर सकेंगे, क्योंकि 2010 में निर्वाचित बीडीसी सदस्यों का कार्यकाल अभी खत्म नहीं हुआ है और नए सदस्यों ने शपथ नहीं ली है। ऐसे में 2010 में निर्वाचित बीडीसी सदस्य ही स्थानीय प्राधिकारी के चुनाव में मतदान कर सकेंगे। 
इसके अलावा जो नए ग्राम प्रधान शपथ ग्रहण कर चुके हैं, उन्हें भी मतदान का अधिकार होगा। सूत्रों के मुताबिक पंचायत चुनाव की तरह इस चुनाव में भी धनबल और बाहुबल का जमकर उपयोग होता है। हालांकि सबकुछ पर्दे के पीछे होता है। सूत्रों का कहना है कि चुनाव में चार हजार से ज्यादा वोटर हैं। जिस प्रत्याशी को इन वोटरों का समर्थन मिलेगा, सीट भी उसी को मिलेगी। अगर कोई प्रत्याशी सात से आठ सौ वोटर अपने पक्ष में कर लेता है तो उसकी जीत काफी आसान होगी। ऐसे में इन वोटरों को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए दबी जुबान से बोली लगने लगी है। प्रति वोटर 20 हजार से एक लाख रुपये तक की बोली लगाई जा रही है और मनी से वोटरों का मन टटोलने की कोशिश की जा रही है।
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