सिविल सेवा-2015 में भी हिन्दी पट्टी के प्रतियोगियों को एक बार फिर निराशा हाथ लगते दिख रही है। संघ लोक सेवा आयोग ने शनिवार को मुख्य परीक्षा का रिजल्ट घोषित कर दिया। परिणाम यहां के प्रतियोगियों के लिए उत्साहजनक नहीं है। इससे प्रतियोगियों में निराशा है।
हिन्दी पट्टी प्रतियोगियों के राष्ट्रव्यापी आंदोलन के बाद सिविल सेवा-2015 प्रारंभिक परीक्षा मेें सीसैट के पेपर को क्वालीफाइंग कर दिया गया। प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में इसका कुछ सकारात्मक प्रभाव भी दिखा और यहां के प्रतियोगियोें की सफलता का ग्राफ कुछ ऊंचा हुआ। इसके बाद मुख्य परीक्षा तथा अंतिम परिणाम में बेहतर सफलता की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन मुख्य परीक्षा के रिजल्ट ने निराश किया है। शनिवार देर रात तक प्राप्त जानकारी के अनुसार रिजल्ट काफी निराशाजनक है।
एएन झा हॉस्टल के मात्र तीन अंत:वासी मुख्य परीक्षा में सफल हुए हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कई हॉस्टल से तो एक भी छात्र देश की इस सबसे प्रतिष्ठित भर्ती की मुख्य परीक्षा की बाधा भी पार नहीं कर सके। मृणाल यादव, विनोद यादव, सुधांशु शेखर उपाध्याय आदि मुख्य परीक्षा में सफल हुए हैं। जबकि, प्रारंभिक परीक्षा में सीसैट लागू होने तथा मुख्य परीक्षा में नया प्रारूप लागू होने से पहले इलाहाबाद से अंतिम रूप से चुने गए प्रतियोगियों की संख्या 50 से अधिक रहती थी। मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की संख्या तो काफी अधिक अधिक रहती थी। सिविल सेवा कोच रनीश जैन का कहना है कि परिणाम अपेक्षित नहीं रहा। पेपर के नए प्रारूप में अभ्यर्थी के अभिव्यक्ति और मूल सोच की परख होने लगी है। प्रतियोगियों के इस बदलाव को समझना होगा।