the mobile towers of crores left in the area of river ganga
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माघ मेला में मोबाइल नेटवर्क के लिए करोड़ों रुपये की लागत से लगाए गए टावर और ट्रेलर के अलावा मशीनें गंगा में डूबकर नष्ट हो सकती हैं। माघ मेला के दौरान लगाए गए इन टावरों को अभी तक खोला नहीं जा सका है। बारिश से पहले गंगा पर बने पांटून पुल और चकर्ड प्लेट की सड़कें खोले जाने के बाद इस टावरों को संगम क्षेत्र से निकालना मुश्किल हो गया है। इसलिए कि इनमें से कई टावरों को खोलने के लिए दोबारा पांटून पुल बनाना होगा। कहा जा रहा है कि मानसूनी बारिश शुरू होने के बाद किसी भी समय ये टावर पानी में डूब सकते हैं।
संगम क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क के लिए लगाए गए छह से अधिक टावर अभी तक हटाए नहीं जा सके हैं। इनमें टावर के साथ ही ट्रेलर भी हैं। यह नौबत तब आई है, जब माघ मेला बीते चार महीने हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि इन टावरों का संचालन माघ मेला के दौरान भारत संचार निगम लिमिटेड ने किया था। रविवार को बीएसएनएल प्रबंधन ने उन टावरों से पल्ला झाड़ लिया। बीएसएनएल के डीजीएम अनिल पटेल ने बताया कि संगम क्षेत्र में लगे टावरों का इस्तेमाल मोबाइल नेटवर्क के लिए किया गया था, लेकिन वो टावर बीएसएनएल के नहीं हैं। अलबत्ता माघ मेला प्रशासन की ओर से एक निजी कंपनी के जरिए किराए पर उपलब्ध कराए गए थे।
उन टावरों पर बीएसएनए की ओर से बीटीएस लगाए गए थे, जिन्हें समय रहते खोल कर हटाया जा चुका है। प्रभारी माघ मेलाधिकारी रजनीश कुमार मिश्र ने बताया कि दिल्ली की इंडस टावर लिमिटेड कंपनी को माघ मेला में टावर लगाने का ठेका दिया गया था। मेला बाद टावर हटाने के लिए कंपनी को कई बार पत्र भेजा जा चुका है। माघ मेलाधिकारी का कहना है कि अगर बारिश हो जाती है और टावर पानी में डूब जाते हैं तो इसकी जिम्मेदारी मेला प्रशासन की नहीं होगी।