prayagraj news : भानुचंद्र गोस्वामी।
- फोटो : prayagraj
गंगा किनारे शवों के दफनाए जाने का मुद्दा डीएम भानु चंद्र गोस्वामी को भारी पड़ा। देश ही नहीं विदेशी मीडिया में भी यह मुद्दा छाया रहा लेकिन डीएम ने चुप्पी नहीं तोड़ी, जो उनके खिलाफ गया। शव से कफन हटाए जाने के मामले में जांच बैठाए जाने का फैसला भी कई अफसरों को नागवार गुजरा, जिसकी सरकार में शीर्ष पर बैठे लोगों तक शिकायत भी हुई थी। ऐसे में कोरोना की दूसरी लहर से कुछ राहत मिलते ही इस मुद्दे पर ऐक्शन मोड में आई योगी सरकार ने डीएम भानु चंद्र गोस्वामी को लखनऊ बुला लिया। भानु चंद्र गोस्वामी को ग्रामीण सडक़ विकास अभिकरण का सीईओ बनाया गया है।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान प्रयागराज में गंगा किनारे शवों के दफनाए जाने का मुद्दा छाया रहा। श्रृंग्वेरपुर, फाफामऊ आदि घाटों पर रोजाना सैकड़ों शवों के दफनाए जाने की शिकायतें मिलती रहीं। शवों के बेकदरी की भी शिकायतें रहीं लेकिन प्रशासन इस मुद्दे पर मौन रहा। यहां तक कि घाटों पर रोजाना कितने शव पहुंच रहे हैं इसकी गणना की भी जरूरत नहीं समझी गई। इसके विपरीत डीएम और डीआईजी के संयुक्त आदेश पर एक वायरल वीडियो की जांच बैठा दी गई, जिसमें कुछ लोग शवों पर से कफन हटा रहे हैं।
इसे लेकर काफी विवाद हुआ, जो अब भी जारी है। इन बिंदुओं को लेकर विपक्ष के साथ कई सामाजिक संगठनों की नाराजगी भी सरकार को झेलनी पड़ी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, भाजपा नेताओं, विधायकों का एक वर्ग शव दफनाए जाने के मामले में भानु चंद्र गोस्वामी की भूमिका से नाराज था। इसके अलावा नेताओं का एक वर्ग डीएम की कार्यशैली से भी नाराज चल रहा था। बताया जा रहा है कि भाजपा के अलावा संघ के एक वरिष्ठ नेता ने एक सप्ताह पहले शीर्ष नेतृत्व से शिकायत की थी। इसके बाद से ही भानु चंद्र गोस्वामी का तबादला तय हो गया था।