प्रदेश सरकार के पूर्व महाधिवक्ता व हमीरपुर के पूर्व सांसद विजय बहादुर सिंह ने कहा कि संविधान में न्यायपालिका लोकतंत्र की सर्वोच्च निगरानीकर्ता (सुपरवाइजर) है। ऐसे में इसका अपमान करने वाला प्रथम दृष्टया संविधान विरोधी माना जाना चाहिए। यह कृत्य संविधान के साथ ही 145 करोड़ जनता का अपमान है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक याची की ओर से स्वयं की पैरवी के दौरान कथित रूप से मुख्य न्यायाधीश के प्रति अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग की घटना की कड़ी निंदा की।
विजय बहादुर सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और उसके मुख्य न्यायाधीश के प्रति सम्मान प्रत्येक नागरिक का सांविधानिक और नैतिक दायित्व है। किसी भी परिस्थिति में सुप्रीम कोर्ट के प्रति अपमानजनक भाषा स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि यह देश की सर्वोच्च अदालत की उदारता है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई नहीं की।
पूर्व महाधिवक्ता ने अधिवक्ता समुदाय से अपील की कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसे व्यक्ति का पूर्ण बहिष्कार किया जाना चाहिए। कोई भी अधिवक्ता देश की किसी भी अदालत में उसके किसी मामले की पैरवी न करे। उसे अधिवक्ता समुदाय की ओर से ब्लैकलिस्ट भी किया जाए।
उन्होंने आम जनता से भी ऐसे व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करने की अपील की। कहा कि न्यायालय के भीतर इस तरह का अमर्यादित आचरण न्याय व्यवस्था की नींव पर सीधा प्रहार है। यदि ऐसे मामलों में समय रहते कड़ा संदेश नहीं दिया गया तो भविष्य में न्यायपालिका की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं के सम्मान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।