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इलाहाबाद विश्वविद्यालयः पूर्व विभागाध्यक्ष से 26.50 लाख की वसूली का मुद्दा गरमाया

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allahabad university - फोटो : प्रयागराज
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  • केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जांच कमेटी से की गई शिकायत
  • भूगोल विभाग में अतिथि प्रवक्ताओं के वेतन भुगतान के मामले में हुई थी कार्रवाई
  • प्रो. हांगलू के कार्यकाल में हुआ था वसूली का आदेश, नहीं मिल सकी ग्रेच्युटी
 इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में भूगोल विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. मनोरमा सिन्हा से इविवि प्रशासन ने गलत तरीके से 26.50 लाख रुपये की वसूली की। यह कार्यवाई पूर्व कुलपति प्रो. रतनलाल हांगलू के कार्यकाल में की गई। मामले की शिकायत अब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की जांच कमेटी के समक्ष दर्ज कराई गई है।
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प्रो. हांगलू के इविवि में कुलपति पद पर ज्वाइन करने से पहले ही भूगोल विभाग में कई अतिथि प्रवक्ता पढ़ा रहे थे। प्रो. हांगलू के कार्यभार संभालने के बाद इन अतिथि प्रवक्ताओं की नियुक्ति को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। इस बीच तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रो. मनोरमा सिन्हा ने अतिथि प्रवक्ताओं के वेतन भुगतान से संबंधित बिल को पास करते हुए वित्त विभाग के पास भेज दिया और इसी आधार पर वित्त विभाग ने अतिथि प्रवक्ताओं को 26.50 लाख रुपये वेतन का भुगतान कर दिया गया। यह बिल इविवि प्रशासन के विभिन्न अफसरों ने पास किया, लेकिन किसी ने इस पर आपत्ति नहीं लगाई।



असिस्टेंट रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार और फिर अंत में वित्त अधिकारी ने भुगतान के आदेश जारी कर दिए। मामले में तत्कालीन कुलपति प्रो. हांगलू ने भूगोल विभाग की तत्कालीन विभागाध्यक्ष प्रो. मनोरमा सिन्हा के वेतन से 26.50 लाख रुपये की वसूली के आदेश जारी कर दिए। 
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इसके बाद प्रो. मनोरमा की ग्रेच्युटी, जीपीएफ  और पेंशन से इस धनराशि की वसूली की गई, जबकि पेंशन से वसूली का कोई नियम नहीं है। ग्रेच्युटी से 20 लाख रुपये, सातवें वेतन आयोग के तहत मिले पेंशन के एरियर से साढ़े तीन लाख रुपये और तीन लाख रुपये सामान्य भविष्य निधि से काटे गए। ग्रेच्युटी की पूरी रकम ही वसूली में चली गई थी। अब इस मामले की शिकायत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की तीन सदस्यीय जांच कमेटी से की गई है कि किस तरह प्रो. हांगलू ने अपनी मनमानी करते हुए बिना जांच के एक वरिष्ठ प्रोफेसर से वसूली के आदेश जारी कर दिए और जिन अफसरों के आदेश से भुगतान हुआ, उनके खिलाफ  कोई कार्रवाई नहीं की गई।



जांच कमेटी को यह भी बताया कि प्रो. मनोरमा सिन्हा विभागीय राजनीति का शिकार हुईं थीं। विभाग के ही दो अन्य वरिष्ठ शिक्षकों ने उनके खिलाफ साजिश की और इनमें से एक शिक्षक की नियुक्ति ही विवादित है और उन्हें प्रो. हांगलू का संरक्षण भी प्राप्त था।

वसूली गई रकम को वापसी करने की होगी मांग
ऑटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शास्त्री का कहना है कि प्रो. मनोरमा सिन्हा के मामले में कार्यवाहक कुलपति प्रो. आरआर तिवारी को ज्ञापन दिया जाएगा और मांग की जाएगी कि वसूली गई रकम प्रो. मनोरमा को वापस की जाए। प्रो. शास्त्री का कहना है कि इस मामले में किसी क्लर्क या वित्त अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रो. मनोरमा ने बिल को केवल फॉरवर्ड किया था। उन्होंने भुगतान संबंधी कोई आदेश नहीं दिया। इसके बावजूद एक शिक्षक के खिलाफ अन्याय पूर्ण कार्रवाई की गई।
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