मचान वाले बाबा करते हैं देखरेख
संगम में हर वर्ष माघ मेला और 6 वर्ष पर अर्ध कुंभ 12 वर्ष पर महाकुंभ लगता है। एक महीने से अधिक चलने वाले मेले में पूरा तंबुओं का शहर बसता है। इस मेले में कई साधु संतों के पंडाल लगने वाले मेले में आकर्षण का केंद्र होते हैं। इन्हीं बाबाओं के बीच में प्रयागराज झूंसी पुल के पास मचान वाले बाबा का आश्रम है। बाबा को मचान वाले बाबा भी कहा जाता है। बाबा ने अपनी मचान को तकरीबन डेढ़ मंजिला मकान की बराबर बांस के सहारे मचान बनवाया है। जब बाढ़ बहुत विकराल रूप ले लेती है तो मचान वाले बाबा कुटिया को छोड़कर गंगा के किनारे आश्रम में चले जाते हैं और हर दिन अखंड ज्योति को देखने के लिए नाव से पहुंचते हैं।