विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक-आध्यात्मिक समागम वाले कुंभ में पहुंचे संत मोरारी बापू ने रविवार को कहा कि तीर्थराज निर्वाण की भूमि है। यहां आने वालों को वह सब कुछ मिल सकता है, जिसे वह पाना चाहते हैं। कुंभ में अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष चारों पदार्थों के भंडार खुल जाते हैं। रेती पर कल्पवास करने वालों को लिए यह खजाना सहज प्राप्त होगा। त्रिवेणी के तट पर सभी कामनाओं की पूर्ति होगी। मन के सारे विकार और क्लेश मिटेंगे अलग से।
निंबार्क नगर स्थित जगदगुरु निंबार्काचार्य के शिविर में मानस संगम कथा के दूसरे दिन संत मोरारी बापू ने हजारों की तादाद में उमड़े कथा प्रेमियों को भक्ति भाव के सागर की लहरों में सराबोर किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ तन का नहीं, मन का संगम होना चाहिए। पारिवारिक विघटन रोकने की उन्होंने सीख दी। रिश्तों में बिखराव पर उन्होंने चिंता जताई। पति-पत्नी दोनों के बीच मन का संगम होने पर उन्होंने जोर दिया। कहा कि अहंकार को छोड़ एक -दूसरे को नकारे बिना मन का संगम होना चाहिए। पति-पत्नी यानी एक के मन की गंगा और दूसरे के मन की यमुना का मिलन होना चाहिए। बापू ज्ञान,भक्ति की गंगा बहाने के साथ ही नशे से दूर रहने का भक्तों को संदेश दिया। कहा कि इस कुंभ में कई तरह की संस्कृतियों, विचारों का एक साथ मिलन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के साथ ही माता-पिता और संतान के मन का मिलन होना चाहिए। पुत्र ही माता-पिता का आसरा होता है। इसलिए पुत्र अगर माता-पिता के मन के साथ नहीं चलेगा तो परिवार आगे नहीं बढ़ सकता। युवाओं का उन्होंने आह्वान किया कि वह किसी भी समस्या को बड़ी बनाने से बचें। समस्याओं को सिर पर खड़ा करने की बजाए मूल्यों का अनुसरण करना चाहिए। इस संगम में हर तरह की समस्याओं का भी संगम होता है। लोग अपने हर तरह के दुख लेकर भी आते हैं। संत समागम में कष्टों, समस्याओं से मुक्ति के लिए कामनाएं करते हैं। उन्होंने तीर्थराज की महिमा का बखान किया। कहा कि इस संगम में हर समस्या का समाधान निहित है। जरूरत है इस संगम में मन का मेल करने की। इस मौके पर निंबार्क पीठाधीश्वर के अलावा महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, समाज सेवी किशन जालान, अखिलेश खेमका समेत हजारों की तादाद में कथा प्रेमी उपस्थित थे।
संगम तट स्थित निंबार्क नगर में काशी नरेश डॉ. अनंत नारायण सिंह ने रविवार को संत मोरारी बापू का आशीर्वाद लिया। कथा में वह आरंभ से अंत तक मौजूद थे। काशी नरेश से संत मोरारी बापू ने कुशल क्षेम पूछी।
मोरारी बापू की मानस संगम कथा के प्रसंगों पर देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे। कथा के दौरान संगीतमय चौपाइयों, भजनों के बोल पर कई महिलाएं और पुरुष झूमते-थिरकते रहे।