10वीं मुहर्रम पर ऐतिहासिक बुड्ढा ताजिया के जुलूस में हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। जुमा की नमाज के कारण ताजियों के निर्धारित समय में बदलाव किया गया। दोपहर बाद शहर की प्रमुख सड़कों पर जुलूस निकाले गए। देर शाम कर्बला में अकीदत के साथ सुपुर्द-ए-खाक किए गए।
बुड्ढा ताजिया नुरुल्लाह रोड से दोपहर करीब दो बजे उठाया गया। यह खुल्दाबाद मरकरी चौराहा, मछली बाजार चौराहा और हिम्मतगंज होते हुए कर्बला पहुंचा। यहां ताजिये को दफन किया गया।
वहीं, बड़ा ताजिया इमामबाड़े से फातिहा के बाद फूल को वाहन पर रखकर जानसेनगंज, घंटाघर, सेवई मंडी, नक्खास कोना, खुल्दाबाद मरकरी चौराहा और हिम्मतगंज होते हुए कर्बला ले जाया गया। रास्ते भर या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। बड़े ताजिया कमेटी के सचिव इमरान खान ने बताया कि जुमा की नमाज के कारण फूल को करीब 2:15 बजे रवाना किया गया।
इस दौरान व्यवस्था में मोहम्मद शमीम, इसरार नियाजी, फैय्याज अहमद, मोइन हबीबी, आसिफ अंसारी, चांद मियां, फरहत खान, सलामत खान, सोहेल खान, आमिर खान, जावेद खान और अकरम शगुन सहित कमेटी के सदस्य सक्रिय रहे।
जुलूस के मार्ग पर शरबत, ठंडा पानी, शीरमाल और अन्य खाद्य सामग्री वितरित की गई। भीषण गर्मी के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। कर्बला चौराहे पर मेले जैसा माहौल रहा। शहर के विभिन्न इलाकों से निकले मेहंदी के जुलूस और अन्य ताजिये भी कर्बला पहुंचे। जुलूस मार्ग पर पुलिस बल, आरएएफ और सिविल डिफेंस के जवान तैनात रहे। प्रमुख चौराहों पर बैरिकेडिंग की गई और ड्रोन व सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई।