इमामबाड़ा मिर्जा सफदर अली बेग से निकले दुलदुल का बोसा लेने के लिए उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़।अमर
- फोटो : shiv tripathi
मुहर्रम की सातवीं तारीख को मंगलवार भोर में पानदरीबा स्थित इमामबाड़ा मिर्जा सफदर अली बेग से 1836 में स्थापित दुलदुल का ऐतिहासिक गश्ती जुलूस निकाला गया। जुलूस शाहगंज, पत्थर गली, बरनतला, मिन्हाजपुर व सब्जी मंडी समेत कई इलाकों से होकर गुजरा। इस दौरान लोगों ने इमाम हुसैन के वफादार घोड़े जुलजनाह (दुलदुल) की निशानी के रूप में सजे घोड़े का घर-घर इस्तकबाल किया।
अकीदतमंदों ने दूध-जलेबी खिलाकर श्रद्धा व्यक्त की। मुस्लिम महिलाओं के साथ बड़ी संख्या में हिंदू परिवारों ने भी दुलदुल का स्वागत किया। दायरा शाह अजमल स्थित इमामबाड़ा अली नकी जाफरी से इंतेजार मेहंदी, सैय्यद हामिद, मजहर जैदी और जाफर मेहंदी के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक अलमों के साथ मातमी जुलूस निकाला गया।
पारंपरिक नौहाख्वानी के बीच जुलूस डॉ.मुस्तफा के इमामबाड़े तक पहुंचा, जहां दुलदुल को विश्राम देने के बाद दूसरे घोड़े के साथ आगे की गश्त पूरी की गई।
आयोजन में मिर्जा चंगेज, सुहैल, शमशाद, जहांगीर, सलीम, मुन्ना, माहे आलम, छोटे बाबू, मुर्तुजा अली बेग, मुज्तबा अली बेग, रिजवान और सादिक की विशेष भूमिका रही। इस दौरान सैय्यद मोहम्मद अस्करी, बाकर मेहंदी, जहीर हाशिम, शौकत, मुज्तबा हैदर कदर रहे। ब्यूरो