ट्रायल कोर्ट के द्वारा सुनाए गए फैसले में कोई खामी नहीं
मामले में कोर्ट ने एक साथ सजा चलने के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया था। मामले में याची ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। मामले में सजा के बिंदु पर बहस हुई। दोष सिद्धि के निष्कर्षों पर विवाद नहीं किया गया। याची की ओर से कहा गया कि क्योंकि सत्र न्यायालय ने सजा के एक साथ चलने के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया। इसलिए वह बाहर नहीं आ सके। जबकि, वे 18 साल, नौ महीने की सजा काट चुके हैं।
कोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा में कोई गलती नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि जहां अभियुक्त को एक मुकदमे में कई अपराधों के लिए दोषी ठहराया जाता है और सजा सुनाई जाती है, न्यायालय निर्देश दे सकता है कि सजाएं साथ-साथ चलेंगी। कोर्ट ने मामले को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए सजा को बरकरार रखा, लेकिन यह कहा कि अलग-अलग अपराधों के लिए सजाएं साथ-साथ चलेंगी।