याची ने कमिश्नर विंध्याचल के समक्ष इस नोटिस के खिलाफ अपील की लेकिन उसे राहत नहीं मिली। उसने हाईकोर्ट में नोटिस को चुनौती दी। याची के अधिवक्ता ने कहा कि उसे एक षडय़ंत्र के तहत फंसाया जा रहा है। पुलिस उसे जिला बदर करना चाहती है। इसलिए वह जानबूझकर ऐसा कर रही है। जबकि, उसके खिलाफ केवल गोव वध अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज है। वह न तो किसी गैंग का लीडर है और न ही किसी गैंग का सदस्य है।
याची ने अपने समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के कई केसों का हवाला दिया। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता ने विरोध किया। कहा कि नोटिस सही जारी की गई है। उसमें कोई गलती नहीं है। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याचिका को स्वीकार करते विंध्याचल कमिश्नर के आदेश और एडीएम द्वारा जारी नोटिस को रद्द कर दिया।