इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की चिकित्सा जांच में देरी और उत्तर प्रदेश में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती में असमानता पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि गजब हाल है, लखनऊ में 78 रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं और बलिया समेत कई जिलों में एक भी नहीं। यह चिकित्सा संसाधनों में भयंकर असंतुलन को दर्शाता है। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकलपीठ ने प्रकाश कुमार गुप्ता की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दाैरान किया है।
बलिया के प्रकाश कुमार गुप्ता पर नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज था। ऑसिफिकेशन टेस्ट में पाया गया कि पीड़िता की आयु 19 वर्ष है। इस पर आरोपी को जमानत दे दी गई। इस दौरान न्यायालय ने पाया कि बलिया में कोई भी रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण पीड़िता को उम्र निर्धारण की जांच के लिए वाराणसी के कबीरचौरा अस्पताल ले जाया गया।
यहां रेडियालॉजिस्ट ने जांच करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद पीड़िता को आजमगढ़ के अतरौलिया ले जाया गया, जहां जांच हुई। इस दौरान पीड़िता को एक आश्रयगृह में रात बितानी पड़ी। मामले में कोर्ट ने रेडियोलॉजिस्ट, सीएमएस कबीर चौरा को तलब किया था। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य से प्रदेश भर में तैनात रेडियोलॉजिस्ट की जानकारी मांगी थी।
कोर्ट के निर्देश पर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ने जो रिपोर्ट प्रस्तुत की, उसमें खुलासा हुआ कि लखनऊ में 78, प्रयागराज में 13 और कानपुर नगर में 14 रेडियोलॉजिस्ट तैनात हैं, जबकि बलिया सहित कई जिलों में एक भी नहीं। कोर्ट ने कहा कि बड़े शहरों को विशेषज्ञों से भर देना और छोटे जिलों को नजरअंदाज कर देना, न केवल नीति विफलता है, बल्कि शहरी झुकाव और तंत्र की कमजोरी का भी प्रमाण है। ऐसी व्यवस्था निचले स्तर पर जनता को स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित करती है।
हाईकोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है कि हर मरीज का इलाज करें, चाहे वह किसी भी क्षेत्र का हो। पीड़िता को जगह-जगह भटकाने और परीक्षण से इन्कार की घटनाओं को कोर्ट ने मानवाधिकारों का उल्लंघन माना। कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह हर जिले में कम से कम एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति सुनिश्चित करे और विशेषज्ञ डॉक्टरों को केवल चिकित्सकीय कार्यों में लगाए, न कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों में। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रजिस्ट्रार अनुपालन इस आदेश की एक प्रति प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश को भेजेंगे।