इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धार्मिक संस्था से गृहकर वसूले जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर नगर आयुक्त प्रयागराज से जवाब मांगा है। कोर्ट ने नगर आयुक्त को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि क्या संबंधित कानून की धारा 177 बी के तहत धर्मार्थ सोसायटी से गृह कर लिया जा सकता है? यदि हां तो किस नियम व कानून के तहत गृह कर लिया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी पूछा है कि किस नियम के तहत धर्मार्थ सोसायटी से गृह कर लेने के संबंध में राज्य सरकार से दिशा निर्देश लेने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि यदि हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो नगर आयुक्त अगली सुनवाई के दिन हाजिर हो। याचिका की सुनवाई 25 नवंबर को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति डा वाई के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने हासिमपुर रोड स्थित कमला नेहरू मेमोरियल हास्पिटल, प्रयागराज की याचिका पर दिया है।
याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता जे नागर, राज्य सरकार के अधिवक्ता बीपी सिंह कछवाहा व नगर निगम के अधिवक्ता एस डी कौटिल्य ने बहस की। याची का कहना है कि इससे पहले भी निगम ने गृहकर मांगा था। याची ने आपत्ति की कि धर्मार्थ सोसायटी से गृह कर की वसूली नहीं की जा सकती। इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी ने वसूली पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी और राज्य सरकार से दिशा निर्देश मांगे थे। नगर निगम प्रयागराज ने दो मई 20 को गृह कर जमा करने का नोटिस दिया है, जिसे याचिका में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने कहा है कि यदि याची की आपत्ति तय की गई हो तो उसकी प्रति दाखिल की जाए।