कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। यह मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित था। ऐसे में आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए परिस्थितिजन्य साक्ष्य की श्रृंखला पूरी होनी चाहिए। कोर्ट ने पाया कि शव की बरामदगी का साइट-प्लान कथित बरामदगी के दो दिन बाद तैयार किया गया था। इसमें खेत में पानी की मौजूदगी का कोई उल्लेख नहीं था, जबकि मृत्यु का कारण डूबना बताया गया था।
अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई सीसीटीवी फुटेज पर भरोसा नहीं किया जा सका। क्योंकि, जिसके घर कैमरा लगा था उससे पूछताछ नहीं की गई थी और अन्य औपचारिकताएं पूरी नहीं की गईं। अभियोजन पक्ष आरोपी के लिए अपराध करने का कोई स्पष्ट मकसद स्थापित नहीं कर सका। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने सजा रद्द कर दी।