संबद्धता पर नजर डालें तो सबसे अधिक 20 सफाई कर्मी पंचायती राज कार्यालय से संबद्ध किए गए हैं। इसके बाद 17 ऐसे सफाई कर्मी हैं, जिन्हें विकास भवन में स्थित स्वच्छ भारत मिशन के वार रूम से अटैच किया गया है। इनके अलावा आठ सफाई कर्मी सीडीओ के दफ्तर से संबद्ध किए गए हैं।
इसी तरह जिला विकास अधिकारी कार्यालय से छह, डीआरडीए से तीन, मनरेगा से दो और डीएसटीओ, पंचस्थानी चुनाव व डीसीएनआरएलएम कार्यालय से एक-एक सफाई कर्मी संबद्ध हैं। इन कार्यालयों में सफाई कर्मियों से कहीं फाइलें उठाने तो कहीं चाय-समोसा मंगाने का काम लिया जा रहा है। पता चला है कि इसके अलावा कई सफाई कर्मी अफसरों के बंगले पर बेगार करने के लिए भी लगाए गए हैं। खाना बनाने से लेकर बागवानी की गुड़ाई-निराई के काम में भी सफाई कर्मी लगाए गए हैं।
संबद्धता का आदेश निरस्त करने के आदेश को दिखाया ठेंगा
ऐसा भी नहीं कि इन सफाई कर्मियों की संबद्धता के बारे में आला अफसरों को पता नहीं है। इस मामले को लेकर कुछ लोग हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटा चुके हैं। दो वर्ष पहले छह अक्तूबर 2020 को हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में पारित आदेश के क्रम में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव ने ग्राम पंचायतों से हटाकर विभिन्न कार्यालयों में लगाए गए सफाई कर्मियों की संबद्धता खत्म करने का आदेश दिया था। तब डीपीआरओ रहीं रेनू श्रीवास्तव ने संबद्धता समाप्त कर दी थी। लेकिन फिर इनके बाद जिला पंचायत राज अधिकारी बने आलोक सिन्हा ने फिर इन सफाई कर्मियों को मनचाहा कार्यालयों से संबद्ध कर दिया।
मनरेगा और चुनाव जैसे कार्यों के लिए कुछ कर्मियों को संबद्ध किया जाता है। अगर किसी ग्राम पंचायत में किसी सफाई कर्मी के गैरहाजिर होने या न आने की शिकायत है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। इसकी मैं जांच कराऊंगा। शिपु गिरि, मुख्य विकास अधिकारी।
संबद्धता का यह आदेश आज कल में जारी नहीं किया गया है। ऐसे में इस पर कुछ कहना ठीक नहीं है। अचानक इस पर सवाल खड़ा करने का औचित्य मेरी समझ में नहीं आ रहा है। आलोक सिन्हा, जिला पंचायत राज अधिकारी।