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वृहदपीठ तय करेगी मजिस्ट्रेट के आदेश से नाबालिग को बाल गृह में रखने की वैधता

Mon, 07 Dec 2020 07:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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कोर्ट
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न्यायिक मजिस्ट्रेट या चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के आदेश से नाबालिग को बाल गृह में रखना वैध है या अवैध यह फैसला अब बड़ी पीठ करेगी। इस मुद्दे को लेकर अभी तक विरोधाभासी फैसले हैं जिनमें एक फैसले में ऐसे आदेश को वैध माना गया है जबकि एक अन्य फैसले में ऐसे निर्णय को अवैध मानते हुए कहा गया है कि याची को ऐसी निरुद्धि के खिलाफ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल करने का अधिकार है। 
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न्यायिक निर्णयों में इस मतभिन्नता को देखते हुए मामला वृहदपीठ को निर्णय लेने के लिए  मुख्य न्यायाधीश को भेजी गई है। वैध आदेश से निरूद्धि के खिलाफ याचिका पोषणीय है या नहीं  शयह फैसला वृहदपीठ द्वारा किया जाएगा।यह आदेश न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर तथा न्यायमूर्ति पी के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने याची  रचना व अन्य की बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। 

याची का कहना है कि उसके घर में रह रही नाबालिग लड़की आंचल को 16 फरवरी 20 पुलिस ने बरामद किया। आंचल के परिवार की तरफ से एफआई आर दर्ज कराई गई है।   आंचल को   पुलिस ने मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया।कोर्ट मे पेश लडकी की मां ने कोर्ट से लड़की को चिल्ड्रेन होम में रखने का अनुरोध किया। जिस पर चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी की भी संस्तुति है।
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मां का आरोप है कि उसकी नाबालिग लडकी को गुमराह कर अपहरण कर लिया गया है। जब कि लडकी ने कहा कि मां ने उसे मारा और वह अपनी मर्जी से सहेली रचना (याची) के साथ रह रही है ।जबकि एफआईआर में याची के भाई व परिवार पर लडकी के अपहरण का आरोप लगाया गया है। सरकारी अधिवक्ता का कहना था कि मजिस्ट्रेट के आदेश से चिल्ड्रेन होम में रखा गया है। याची के पास इस आदेश के खिलाफअपील करने का अधिकार है। 

याची और आचंल के परिवार की ओर से इस मामले में अपने- पक्ष में न्यायिक निर्णय दिए ।इन फैसलों मे विरोधाभास है। एक में मजिस्ट्रेट के आदेश से निरूद्धि को वैध माना गया है और कहा है कि यह न्यायिक प्रक्रिया का अंग है। तो दूसरे फैसले में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट या कमेटी के आदेश पर यदि निरूद्धि विधि विरूद्ध है तो उसके खिलाफ बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की जा सकती है। जुवनायल जस्टिस (केयर एण्ड प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन)एक्ट के तहत बच्चे की इच्छा के विपरीत रखना अवैध निरूद्धि मानी जाएगी। वृहदपीठ को इसी मुद्दे पर फैसला देना है। इस दौरान कोर्ट ने याची से कहा है कि वह चाहे तो  निरूद्धि आदेश के खिलाफ अपील दाखिल कर सकती है।
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