इलाहाबाद (ब्यूरो)। जो बात आजादी के इतने सालों में नहीं हुई। वह केवल कहावत तक सीमित थी। मोदी सरकार ने उसे चरितार्थ कर दिया। 15 महीने में ही उसने दाल और मुर्गे का रेट एक कर दिया। यह बातें कांग्रेसी नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कही। वह मोदी सरकार के 15 महीनों के शासन काल की समीक्षा कर रहे थे।
सिविल लाइंस स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने मोदी सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून संशोधन बिल पर मोदी सरकार की पहली हार है। तीन बार अध्यादेश जारी होने के बाद भी वह इस बिल को संशोधन नहीं करा सकी। उन्होंने इसका श्रेय कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी और देश के किसानों को दिया है। कहा कि मोदी सरकार गुजरात मॉडल को पूरे देश में लागू करना चाहते थे, उसमें वह फेल हो गए। उन्होंने विदेशी नीति और फाइनेंशियल क्राइसिस पर भी सरकार को घेरा।
आरोप लगाया कि मोदी की फॉरेन पॉलिसी भी फ्लॉप साबित हो रही है। उनकी सभाओं को विदेशों में बहुत ज्यादा तरजीह नहीं दी जा रही है। उनकी सभाएं रॉक-शो बन गईं हैं। विदेशी निवेश आने की बजाय बल्कि 15 महीनों में बल्कि 252 बिलियन डॉलर निकाल लिया गया। उन्होंने फाइनेंशियल क्राइसिस के कई कारण भी गिनाए। बिहार चुनाव के बारे में कहा कि वहां गठबंधन में नीतिश फिर मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। बातचीत में उन्होंने कई और मुद्दों पर मोदी को जमकर निशाने पर लिया।