यूएसटीडीए के विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि आईसीटी यानी इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी हर तरह के इंफ्रास्टक्चर की रीढ़ है, सो पीपीपी मॉडल पर एक ऐसा आधार विकसित किया जा सकता है जिससे समस्त शहरवासियों को वाईफाई की सुविधा मिले। अमेरिकी विशेषज्ञोें ने यह सलाह विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों से मिले सुझावों और उस पर प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर दी है। निश्चित ही ये सुझाव बंद कमरे में बैठक तैयार किए गए, वरना वाईफाई की जगह बात शहर की बदहाली पर होती।
शहर में जगह-जगह सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। उन पर बने गड्ढे खाई जैसे नजर आने लगे हैं। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए जिम्मेदार हरी भरी कंपनी के कर्मचारी कहीं नजर नहीं आते, सो शहर में जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा है। पुराने शहर में आधे बिजली आती है और आधे दिन गायब रहती है। शहर की 60 फीसदी आबादी को दूषित पानी मिल रहा है और बात वाईफाई की हो रही है। सर्किट हाउस में शुक्रवार को चार दिनी स्मार्ट सिटी कंसल्टेटिव कार्यशाल पूरी हुई तो बिजली-पानी से जुड़े कुछ सुझाव भी सामने आए। 24 घंटे बिजली-पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी विशेषज्ञों ने सभी बल्क कंज्यूमर्स के लिए माइक्रो ग्रिड स्थापित किए जाने और सभी सार्वजनिक इमारतों में सोलर पैनल लगाने का सुझाव दिया।
सुगम यातायात के लिए नालियों की जगह कवर्ड ड्रेन बनाकर सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने और फुटपाथों पर जगह-जगह वेंडिंग जोन बनाए जाने की सलाह दी। यह सुझाव भी आया कि विश्वविद्यालय को शहर की आर्थिक प्रगति में शामिल करते हुए वहां इनोवेशन सेंटर, स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किया जाए। कमिश्नर राजन शुक्ला ने अमेरिकी विशेषज्ञों से मिले सुझावों को महत्वपूर्ण बताया। महापौर अभिलाषा गुप्ता ने कहा कि ऐसे उपाय किए जाएं जिससे सबको साफ-सुथरा पानी मिले। इस मौके पर डीएम संजय कुमार, डीआईजी जितेंद्र कुमार शाही, एसएसपी जोगिंदर सिंह, एडीएम सिटी डॉ. विपिन कुमार मिश्र ने भी अपने सुझाव रखे।