कोरांव के बासमती चावल की खुशबू देश तथा सीमा से बाहर भी फैलेगी। विदेशों में भी इसका बाजार फैलाने के लिए अमेजॉन से बात हुई है। कंपनी यहां सेंटर खोलने के लिए भी तैयार है। इससे किसानों की आय तो बढ़ेगी ही, स्वयं सहायत समूहों के सदस्यों के लिए भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
कोरांव के बड़े भाग को धान का कटोरा कहा जाता है। वहां बासमती चावल की भी अच्छी पैदावार होती है। अब इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों की भी मदद ली जाएगी। कुछ बड़े समूह चिह्ति किए गए हैं। चयनित समूह किसानों से चावल लेंगे और अलग-अलग भार का पैकेट तैयार करेंगे। सीडीओ अरविंद सिंह ने बताया कि देश के हर क्षेत्र के अलावा विदेशों में भी इसका बाजार उपलब्ध हो इसके लिए अमेजॉन से बात की गई है।
यह कंपनी यहां अपना केंद्र (गोदाम) खोलने के लिए भी तैयार है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन बुकिंग के बाद कंपनी चावल को वहां तक पहुंचाएगी। सीडीओ का कहना है कि किसानाें को नई फसल से ही इस योजना का लाभ मिलेगा। नई फसल तैयार होने से पहले इसकी तैयारी पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने शनिवार को जिले की नोडल अधिकारी प्रमुख सचिव कल्पना अवस्थी के सामने भी रखा। प्रमुख सचिव ने इसकी सराहना करने के साथ हरी झंडी भी दे दी।