Prayagraj News : दारागंज स्थित मोती महल प्रशासनिक दुर्दशा का शिकार हो गया है।
- फोटो : अमर उजाला।
टोडरमल के वंशज चाहते हैं, कि इसका जीर्णोद्धार और संरक्षण उन्हीं की देखरेख में हो। संगम तट पर अकबर के किले के निर्माण के दौरान कैंप करने के लिए टोडरमल ने वर्ष 1585 में मोती महल की नींव डाली थी। 1590 में निर्माण पूरा हुआ। वर्तमान में टोडरमल की 17वीं पीढ़ी के वंशजों का स्वामित्व है। किले के छह में से पांच फाटक टूट चुके हैं। 12 जून 1857 को ब्रिटिश हुकूमत के अंतिम गवर्नर जनरल कर्नल नील ने यहां हमला किया था। तब तोप के गोले दागकर पूरी गारद तो मारी ही गई, पांचों फाटक तोड़ डाले गए थे। इसके बाद फाटक नहीं लगे। अंग्रेजी सेना के हमले में नौ हजार से अधिक लोग मारे थे।
Prayagraj News : दारागंज स्थित मोती महल प्रशासनिक दुर्दशा का शिकार हो गया है। देखरेख के अभाव में पूरा भवन जर्जर हो गया है। इसकी दीवारें तक गायब हो गई है।
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राजा टोडरमल के बारे में
15वीं शताब्दी के बाद टोडरमल झूंसी स्थित प्रतिष्ठानपुरी के राजा थे। पहली बार शेरशाह सूरी ने टोडरमल को अपना राजस्व मंत्री नियुक्त किया था और खजाना भरने की जिम्मेदारी दी थी। 1560 में बैरम खां से परेशान होकर अकबर ने इलाहाबाद में जब पड़ाव डाला था तब वह टोडरमल से प्रभावित हुआ और अपने साथ आगरा ले गया। वहां उसने टोडरमल को राजस्व मंत्री और आंतरिक सुरक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी थी।
बार-बार हुए हमले और छीनाझपटी के बाद यह किला हमें वापस मिला है। अब हम इसे गंवाना नहीं चाहते। सरकार अगर संरक्षण के लिए कदम उठाती है तो स्वागत करेंगे। लेकिन, इसे हस्तांतरित नहीं कर सकते। - सुधांशु अग्रवाल, टोडरमल के वंशज।
अभी तक मोती महल के संरक्षण को लेकर कोई प्रस्ताव या पत्र नहीं आया है। इस ऐतिहासिक महत्व के महल का निरीक्षण किया जाएगा। इसके बाद जो जरूरी होगा, कदम उठाया जाएगा। - संजय खत्री, जिलाधिकारी।
मोती महल शहर की ऐतिहासिक धरोहर में शुमार है। इसका निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। ताकि, इसके संरक्षण का खाका खींचा जा सके। -कर्मवीर तिवारी, संरक्षण सहायक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण-प्रयागराज।