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पहले चंद्रग्रहण, फिर पड़ी परीवा, ऐसे में विदाई कल

Thu, 01 Feb 2018 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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तकरीबन डेढ़ सौ बरसों बाद माघी पूर्णिमा स्नानपर्व के साथ ही चंद्रग्रहण का अद्भुत संयोग बना लेकिन इसके कारण ही कल्पवासियों ने ग्रहण काल में संगम की रेती नहीं छोड़ी। आमतौर पर माह भर के कल्पवास के बाद पांचवें मुख्य स्नानपर्व से पहले ही रेती से विदाई की तैयारियां पूरी कर ली जाती हैं और माघी पूर्णिमा पर डुबकी लगाने के साथ ही कल्पवासी मेला क्षेत्र छोड़ देते हैं लेकिन अबकी चंद्रग्रहण के कारण यह कार्यक्रम कम से कम एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
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कल्पवासियों का मानना है कि जब पूरे माह शुचिता और शुभता के लिए बिताए तो संगम से विदा होने के लिए भी इसका ध्यान रखा जाएगा। इसी के कारण चंद्रग्रहण के मोक्ष के बाद तो श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई ही, उदयातिथि में बृहस्पतिवार को भी डुबकी लगाई जाएगी। हालांकि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कुछ लोगों ने माघी की डुबकी के बाद ही मेला क्षेत्र छोड़ दिया, कुछ चंद्रग्रहण की डुबकी के बाद बृहस्पतिवार को जाएंगे लेकिन ज्यादातर लोग परीवा के बाद ही मेला क्षेत्र से विदा होंगे।
दो लाल बोतल निशान वाले तीर्थपुरोहित रामबिहारी के यहां तीस वर्षों से कल्पवास कर रहीं सिकरीगंज, गोरखपुर की नब्बे बरस की सुमित्रा तिवारी के परिजन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को लिवा ले जाएंगे। इसी तरह हरी मछली निशान वाले तीर्थपुरोहित राजेंद्र पालीवाल के शिविर में कल्पवास कर रहीं मुट्ठीगंज की रामभजो भी चंद्रग्रहण के स्नान के बाद रेती से विदा लेंगी।
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वहीं पियरा का झंडा निशान वाले तीर्थपुरोहित धीरज पंडा के यहां कल्पवास करने वाले सरायचंदी, जंघई के लालता प्रसाद शुक्ल ने कहा, ‘जइसे इत्ते दिन रुके रहै, वैसे दुई दिन अउर, चंद्रग्रहण के स्नान के बाद बृहस्पतिवार को चलै जाते लेकिन एक तो परीवा, दुसरे दिशाशूल, ऐसे में अब शुक्रवार को डुबकी लगावै के बादै जाना होई।’ दो लाल बोतल निशान वाले तीर्थपुरोहित रामबिहारी के यहां कल्पवास कर रहे सराय चौहान, मुंगरा बादशाहपुर के राममूर्ति मिश्रा ने कहा, किसी शुभ काम में आने या जाने के लिए परीवा तिथि नहीं चुनते, दोष होता है। ऐसे में अब शुक्रवार को ही डुबकी लगाने के बाद रेती से विदाई होगी।
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