माघ मेले के पांचवें मुख्य स्नानपर्व माघी पूर्णिमा पर बुधवार को पांचवीं डुबकी के साथ माह भर का कल्पवास पूरा हुआ। इसी के साथ जप, तप, व्रत, नियम, संयम और अनुष्ठान के संकल्प को भी पूर्णता मिली। हालांकि, चंद्रग्रहण के कारण ज्यादातर कल्पवासियों ने संगम की रेती नहीं छोड़ी, ऐसे में स्नान से लेकर कल्पवासियों के बाकी सारे नियम, संकल्प रेती पर रहने तक जारी रहेंगे। माघी पूर्णिमा पर कल्पवासियों के अतिरिक्त देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में आए स्नानार्थियों ने संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। प्रशासन ने माघी पूर्णिमा पर 55 लाख श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का दावा किया।
मंगलवार की रात 9.35 बजे से ही आरंभ माघ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का संचरण बुधवार रात 7.20 बजे तक रहा। इसी के साथ शाम 6.04 बजे तक पुष्य नक्षत्र और बुधवार रात 3.38 बजे तक आयुष्मान योग भी रहा। इन संयोगों में डुबकी लगाने का क्रम पूरे दिन लगा रहा। वैसे कल्पवासियों सहित बड़ी संख्या में स्नानार्थियों ने चंद्रग्रहण के सूतक के नौ घंटे पूर्व यानी प्रात: 8.39 बजे से पहले ही स्नान किया। साथ ही पूजन-अनुष्ठान भी। पूर्णिमा तिथि का संचरण पर्व की पूर्व संध्या पर ही होने से सूतक काल के पहले ही डुबकी लगाने की आस में भोर से ही स्नानार्थियों का रेती पर जुटना आरंभ हो गया था, जो ग्रहण काल के पहले तक जारी रही।
डुबकी लगाने के साथ तीर्थपुरोहितों और गंगापुत्र घाटियों के यहां गोदान सहित अन्न दान दिया गया, बस हवन, पूजन, अनुष्ठान नहीं हुए। ज्यादातर कल्पवासियों ने तो अपने शिविरों के पास बने घाटों पर ही स्नान किया। माघी पूर्णिमा पर शहरियों और ग्रामीण अंचल सहित पास-पड़ोस के जिलों से ऐसे स्नानार्थी भी पहुंचे, जो अब तक भीड़ के मद्देनजर किसी मुख्य स्नानपर्व पर डुबकी लगाने नहीं आ सके। स्नान-दान और जप, पाठ के बाद लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिरों के कपाट बंद रहे, इसलिए दर्शन-पूजन नहीं हुए। पूर्णिमा पर डुबकी लगाने आए लोगों ने रेती पर विदा होने से पहले घर और रिश्तेदारों के लिए लाई, इलाइचीदाना, कलाईनारा, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर आदि का प्रसाद भी लिया। जाते समय महिलाओं ने माघ मेले के बाजार से घर-गृहस्थी की जरूरत की चीजें भी खरीदीं। गंगा माई का आशीर्वाद लेकर रेती से विदा होने वालों के चलते माघ मेला क्षेत्र की ओर आने औैर जाने वाले रास्तों पर भीड़ का क्रम बना रहा।