राज्यकर्मियों की तीन दिवसीय हड़ताल बुधवार से शुरू हो गई। सरकारी कार्यालयों में कामकाज ना के बराबर हुआ। फाइलें बंद रहीं तो कर्मचारियों की आवाजें बुलंद रहीं। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार कर्मचारी राजकीय मुद्रणालय के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए। अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। हड़ताल से शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य, बाल विकास पुष्टाहार, श्रम विभाग समेत गवर्नमेंट प्रेस, राजस्व परिषद, परिवहन, अर्थ एवं सांख्यिकी, ग्राम विकास विभाग, सिंचाई विभाग समेत कई विभागों में कामकाज प्रभावित रहा। बेली, कॉल्विन समेत कई चिकित्सालयों में भी मरीजों को परेशानी हुई। कई कार्यालयों में ताले भी बंद किए गए। यह स्थिति अभी दो दिनों तक और रहेगी। हालांकि, वाणिज्य कर विभाग हड़ताल में शामिल नहीं हुआ। यूनियन के रामबाबू यादव का कहना है कि व्यापारियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए विभाग के कर्मचारी हड़ताल से अलग रहे।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के बैनर तले कर्मियों ने मकान का किराया भत्ता, पुरानी पेंशन बहाली, उपचार की व्यवस्था में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, कैशलेस सुविधा प्रदान करने, राज्यकर्मियों को केंद्रीयकर्मियों की भांति सभी भत्ते दिए जाने, फील्ड कर्मचारियों को मोटरसाइकिल भत्ता दिए जाने समेत 10 सूत्रीय मांगे दोहराईं। शिक्षा निदेशालय, माध्यमिक शिक्षा परिषद, श्रम कार्यालय में ताला बंदी करते हुए कर्मियों ने अलग-अलग सभाएं कीं। संयुक्त परिषद के अजय भारती ने बताया कि हड़ताल का समर्थन एक्टू नेता डॉ. कमल उसरी, सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर संघ के अध्यक्ष आरपी पांडेय, कर्मचारी महासंघ के नेता (लल्लन गुट) भीम शंकर, यूपी एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल ऑफिसर्स एसोसिएशन, जिला विद्यालय निरीक्षक, व्यापार कर के नेताओं ने किया। दावा किया कि सभी औद्योगिक एवं लिपिकीय कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालयों पर ताला बंद कर सभाएं की।
राजकीय मुद्रणालय पर सभा की अध्यक्षता रामसुमेर ने की। सभा में नौ अगस्त को राज्य कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति द्वारा लखनऊ विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई गई। जगदीश नारायण उपाध्याय, ओम प्रकाश, कुमार गौरव, जय सिंह, रविकांत, राम गोपाल, अल्पनारायण सिंह, कल्लन यादव, अनिल रजक, सुनील कुमार, दिनेश कुमार श्रीवास्तव, अंसारुल हुदा, बीके पांडेय, मो. रिजवान आदि मौजूद रहे।
उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद ने राज्यकर्मियों की हड़ताल का समर्थन किया है। परिषद के संरक्षक स्नातक विधायक डॉ. यज्ञदत्त शर्मा एवं प्रदेश अध्यक्ष बृजेश शर्मा ने संयुक्त रूप बयान जारी कर राज्य सरकार से सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों पर विचार करने, न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये किए जाने की मांग की। जिलाध्यक्ष लल्लू प्रसाद त्रिपाठी, बीएन त्रिपाठी, डॉ. रघुराज सिंह, डॉ. राजकुमार मिश्र, मोरार जी त्रिपाठी, सभापति तिवारी आदि रहे।
राज्यकर्मियों की हड़ताल में फार्मेेसिस्टों के शामिल होने से एसआरएन, बेली, कॉल्विन समेत जिले के सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी सुबह आठ से 11 तक प्रभावित रही। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को भी ऐसा होगा। ओपीडी तीन घंटे सुबह प्रभावित होगी जबकि शुक्रवार को पूरे दिन कामकाज ठप रहेगा। हालांकि, इमरजेंसी और पोस्टमार्टम की सेवाएं सामान्य रहेंगी।