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पुलिस की 20 रुपये की वसूली बनी जानलेवा

Thu, 12 Feb 2015 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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महज बीस रुपये के चक्कर में सब्जी लादकर जा रहा मैजिक वाहन होनहार छात्र अनुपम के लिए यमदूत साबित हुआ। चौराहे पर खड़े पुलिसवालों को बीस रुपए नहीं देना पड़े इसीलिए मैजिक ड्राइवर ने तेज रफ्तार में रेड सिग्नल तोड़कर भागने की कोशिश की और उसकी चपेट में बाइक सवार अनुपम आ गया। यह वजह है कि गुस्साए लोगों और वकीलों का गुस्सा पुलिस के खिलाफ फूट पड़ा।
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यह सच है कि अफसरों की लाख मनाही के बावजूद तमाम चौराहों पर पुलिसवाले ट्रकों और ट्रैक्टरों समेत दूसरे मालवाहक वाहनों से धन उगाही करते हैं। किसी गाड़ी से बीस तो किसी से माल लदे वाहन से 100 रुपये तक वसूलते हैं। बुधवार सुबह सिविल लाइंस में हुए हादसे के पीछे भी पुलिस की धन उगाही ही थी। ट्रैफिक पुलिस के दो सिपाहियों ने मुंडेरा मंडी से सब्जी लादकर जा रही मैजिक को 20 रुपये के लिए रोकने की कोशिश की इसीलिए ड्राइवर ने बचने के चक्कर में स्पीड बढ़ा दी। नतीजा अनुपम की दुखद मौत के रूप में सामने है।

वकीलों का आरोप है कि अपनी करतूत छिपाने की नीयत से ही पकड़े गए ड्राइवर को भीड़ की चंगुल से छुड़ाकर भगा दिया। ऊपर से पुलिस घायल अनुपम को अस्पताल की बजाय थाने ले गई जिसकी वजह से लोगों का गुस्सा और भी भड़क गया। वकीलों का कहना था कि पुलिसवाले अनुपम को फौरन अस्पताल ले जाते तो उसकी जान बच सकती थी। पुलिस की इस संवेदनहीनता ने आग में भी घी काम किया और दुखी लोगों का आक्रोश फूट पड़ा। पहले स्थानीय लोगों ने बवाल काटा और मैजिक में आग लगा दी। फिर अनुपम के साथी छात्र भी जुट गए। पता चला कि अनुपम अधिवक्ता राजकुमार शुक्ल का भतीजा है तो हाईकोर्ट की ओर जा रहे वकील भी जुट गए। पूरे घटनाक्र म में पुलिस की करतूत से वकीलों में जबरदस्त आक्रोश रहा। बीस रुपये के चक्कर में अनुपम की मौत के दोषी पुलिसवालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए वकीलों, छात्रों, ने चक्काजाम कर दिया।
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पहले एकलव्य चौराहे और इसके बाद हाईकोर्ट पानी टंकी पर। भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ के महानगर संयोजक श्रवण दुबे ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट के पांच सौ मीटर दायरे में कमर्शियल वाहन प्रतिबंधित हैं। मगर पुलिस वसूली के चक्कर में इस पर ध्यान नहीं देती है। उन्होंने नो इंट्री जोन में प्रवेश करने वाले वाहनों पर प्रतिबंध और घटना की मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की है। राष्ट्रीय युवा क्रांतिकारी मोर्चा के सुनील कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिसवाले धन उगाही के लिए अक्सर लोगों की जान खतरे में डालते हैं।

एकलव्य चौराहे पर बीएससी छात्र की मौत के बाद हंगामे की सूचना पर एसपी सिटी और एसडीएम मौके पर पहुंचे। हंगामा कर रहे लोगों को एसपी सिटी राजेश कुमार यादव बातचीत कर समझाने का प्रयास कर रहे थे। वकीलों ने मृतक के परिवार को मुआवजे की मांग की। इस पर एसडीएम ने कहा कि खतौनी दिखाओ। यह सुनते ही वकील भड़क गए। वकीलों के तेवर देख एसडीएम और एसपी सिटी को पीछे जाना पड़ा।

एकलव्य चौराहे पर चक्काजाम के चलते उधर आने वाली गाड़ियों को दूसरे रास्तों पर मोड़ा जा रहा था। इस बवाल से बेखबर एक दरोगा दोपहर करीब डेढ़ बजे पत्थर गिरजाघर की तरफ से बाइक पर एकलव्य चौराहे के पास पहुंचा तो वकीलों ने शोर मचाते हुए उसे घेर लिया। वे दरोगा को पीटने और वर्दी खींचने लगे। यह देख कुछ ही दूरी पर खड़े पुलिस अफसरऔर दरोगा लाठियां उठाकर दौड़े। उन्होंने दरोगा से मारपीट कर रहे लोगों को चेतावनी देकर हटाया। कुछ वरिष्ठ वकीलों ने जैसे-तैसे मामला संभालकर पुलिस फोर्स को वापस किया।

छात्र अनुपम की मौत से नाराज वकीलों ने साफ कह दिया कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के बिना वे शांत नहीं होंगे। दोपहर में पानी टंकी चौराहे पर बवाल शुरू होने पर अफसरों ने दोषियों पर कार्रवाई कर दी। एसपी सिटी राजेश यादव ने बताया कि दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। इसमें ट्रैफिक पुलिस के दो सिपाही अखिलेश कुमार और जागेश राव और दो होमगार्ड मुकेश तथा धीरेंद्र शामिल हैं। होमगार्डों के खिलाफ जांच कराई जाएगी। मैजिक ड्राइवर के खिलाफ हत्या का मुकदमा लिखा गया है।

बीएससी के छात्र अनुपम शुक्ला की मौत ने उसके परिवार को गहरा आघात दिया है। रिश्तेदार भी गम में डूबे हैं। सुबह कोचिंग के लिए निकले अनुपम के घर में घंटे भर बाद उसकी मौत की खबर पहुंची तो कोहराम मच गया। अनुपम के पिता इंजीनियर कृष्ण कुमार शुक्ला करीब एक माह पहले मुंबई से घर आए थे। तब से वह यही हैं। उन्हें फोन से अनुपम के साथ हादसे की खबर मिली तो वह सन्न रह गए। उन्होंने पत्नी उर्मिला शुक्ला को बताया तो वह भी रोने-कलपने लगीं। परिवार के लोग बदहवासी के आलम में एसआरएन अस्पताल पहुंचे।

वहां अनुपम का शव देख मां-बाप और छोटा भाई आशीष का कलेजा चाचा राजकुमार शुक्ला को यकीन नहीं हो रहा था कि उनका भतीजा अनुपम इस दुनिया में नहीं है। मूलरूप से प्रतापगढ़ के अंतू  इलाके के सराय गनी गांव निवासी इंजीनियर कृष्ण कुमार शुक्ला मुंबई में बांबे डाइंग कंपनी में बतौर सीनियर मैनेजर कार्यरत हैं। उनके दो बेटों में बड़ा अनुपम पढ़ने में बड़ा होशियार था। उसने डॉक्टर बनने का सपना देख रखा था। इसीलिए वह सिविल लाइंस के कोचिंग इंस्टीटयूट से तैयारी में जुटा था। कृष्ण कुमार भी बेटे अनुपम को डॉक्टर बनाना चाहते थे। मगर उनका यह सपना छिन्न-भिन्न हो गया।
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