इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों की वार्षिक परीक्षा में शामिल होने वाले स्नातक के छात्र-छात्राओं के प्रवेश पत्र इसी सप्ताह ऑनलाइन हो जाएंगे। परीक्षा समिति की बुधवार को हुई बैठक में इसे मंजूरी दे दी गई। इससे 45 हजार विद्यार्थियों को फायदा होगा और अब उन्हें प्रवेश पत्र के लिए लाइन नहीं लगानी होगी।
पत्राचार संस्थान के विद्यार्थियों के लिए भी राहत की खबर है। संस्थान प्रशासन ने छात्र-छात्राओं का पूरा विवरण परीक्षा विभाग को भेज दिया है। अन्य विद्यार्थियों के साथ इनके भी प्रवेश पत्र ऑनलाइन कर दिए जाएंगे। बैठक में डिग्री कम्प्यूट्राइजेशन पर भी अहम फैसला हुआ। विश्वविद्यालय में कम्प्यूट्राइज्ड डिग्री के लिए दो साल से कवायद की जा रही है। कार्यपरिषद की मंजूरी के बावजूद अभी तक इसका प्रारूप तैयार नहीं हो सका।
बैठक में इसके लिए कमेटी गठित कर दी गई। कमेटी डिग्री के प्रारूप, इसके लिए पूरा सेटअप विश्वविद्यालय में होगा या और कोई व्यवस्था होगी, इस पर निर्णय लेगी। कमेटी को एक महीने में रिपोर्ट सौंपनी है। राजनीति विज्ञान विभाग में मानवाधिकार पर डिप्लोमा कोर्स शुरू होना है। इसके लिए पहले एकेडमिक काउंसिल से मंजूरी की बात कही गई। परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय ने बताया कि बैठक में 10 मार्च से शुरू होने वाली परीक्षा की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। बैठक में हुए निर्णय के अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ऑटोनॉमस कालेजों के पास होने वाले अधिकार की समीक्षा करेगा। परीक्षा समिति की बैठक में इस बाबत रजिस्ट्रार से रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा गया। यूइंग क्रिश्चियन कालेज की ऑटोनामी 2013 में ही खत्म हो गई है। इसकी वजह से कालेज के विद्यार्थियों की डिग्री रोक दी गई है। इसी मामले में बुधवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में चर्चा हुई। सदस्यों का कहना था कि यूइंग क्रिश्चियन कालेज खुद परीक्षा कराता है। विश्वविद्यालय को उसकी जानकारी तक नहीं दी जाती। जबकि डिग्री विश्वविद्यालय की होती है। इस पर विवाद उठने के बाद परीक्षा समिति की बैठक में ऑटोनामस कालेजों का अधिकार निर्धारित करने का निर्णय लिया गया। रजिस्ट्रार छुट्टी पर गए हैं। इसलिए कालेज के विद्यार्थियों को डिग्री दिए जाने पर फैसला नहीं हो सका।