उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में बुधवार को सांख्यिकी दिवस पर नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस और विज्ञान विद्याशाखा की ओर से आयोजित सिम्पोजियम में जुटे वक्ताओं ने किसानों की स्थिति पर चिंता जताई। ‘कृषि एवं कृषक कल्याण में सांख्यिकी की प्रासंगिकता’ विषय पर विशिष्ट अतिथि गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर प्रदीप भार्गव ने कहा, देश में किसानों की हालत ठीक नहीं है। किसानों को उनकी उपज का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पा रहा है। विकास के मौजूदा मॉडल से किसान मर रहा है। खाद्यान्न उत्पादों की अच्छी कीमत देने के बाद ही किसानों की स्थिति में सुधार संभव है।
बतौर विशिष्ट अतिथि ‘अमर उजाला’ के संपादक डॉ.सचिन शर्मा ने कहा, अन्नदाता को ही खाने के लिए अनाज नहीं मिल रहा है। किसानों के पास धन एवं अनाज का अभाव है। उनके उत्पाद का अच्छा मूल्य देकर ही उनकी हालात में सुधार किया जा सकता है। तीन मुख्य बिंदुओं जल, जंगल और जमीन के सही तरीके से सरंक्षण के बारे में हमें और सजग होना होगा। इसी क्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने कहा, सही आंकड़ों से ही हम किसानों की समस्याओं का हल निकाल सकते हैं।
कार्यक्रम के अध्यक्ष और कुलपति प्रोफेसर एमपी दुबे ने विकास के अलग-अलग मॉडल पर चर्चा की। विज्ञान विद्याशाखा के निदेशक डॉ.आशुतोष गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। एनएसएसओ के डिप्टी डायरेक्टर शिवम श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। आयोजन सचिव डॉ.गौरव संकल्प ने संचालन तथा निदेशक डॉ.श्रुति ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।