बासमती, गंगा कावेरी और विष्णुभोग से भरेगा धान का कटोराधान का कटोरा कहे जाने वाले कोरांव में इस बार गंगा कावेरी, बासमती, सोनम और विष्णुभोग की बुवाई ज्यादा की जाएगी। अच्छी बारिश और अनुकूल मौसम को देखते हुए किसानों के चेहरे खिल गए हैं। एक सप्ताह में धान की रोपाई शुरू हो जाएगी। यूपी और एमपी के विभिन्न जिलों में सबसे ज्यादा खपत वाले धान की पैदावार के लिए कोरांव क्षेत्र सबसे ज्यादा उपजाऊ है। यहां पैदा होने वाले चावल कई प्रदेशों में निर्यात किए जाते हैं।
कोरांव के किसान रामसजीवन ने बताया कि इस बार जून के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी हो गई है। इससे जल्दी ही जुताई का काम शुरू कर दिया गया है। नगई का पूरा के किसान शिवबहादुर सिंह पटेल ने बताया कि बारिश के कारण सूख रहे बेहन को संजीवनी मिल गई है। कावेरी और विष्णुभोग को पानी की आवश्यकता ज्यादा पड़ती है। ऐसे में यदि इसी तरह बारिश होती रही तो उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
समलीपुर के किसान रामायण प्रसाद द्विवेदी और बिसरी के किसान मदन कुमार सिंह ने बताया कि राजकीय गोदाम से बीज लेकर बेहन उगाया गया है। जुलाई के पहले सप्ताह में धान की रोपाई की जाएगी। इस बार ज्यादा रकबे में खेती होगी। उन्होंने कहा कि हल्की बारिश के कारण पिछले दो सालों से धान का कटोरा खाली रहता था। इस बार अच्छी बारिश के कारण चावल उत्पादन से धान का कटोरा भर जाएगा।
डीएपी और यूरिया के लिए किसान चिंतित
कोरांव में धान का रकबा ज्यादा होने के कारण डीएपी और यूरिया की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में बड़े किसान तो पहले से खाद डंप कर लेते हैं लेकिन छोटे किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। कोरांव की सोमवारी देवी, मुन्नी देवी ओर उमराजी ने कहा कि यदि समय से खाद नहींं मिलेगी तो खेती प्रभावित होगी। उन्होंने शासन से ऐसी व्यवस्था की मांग की है, जिससे तय दामों में खाद मिले। कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई हो।
कोरांव क्षेत्र में लगभग 50 हजार हेक्टेयर धान की रोपाई की जाएगी। इसमें 40 हजार हेक्टेयर गंगा कावेरी, पांच हजार हेक्टेयर विष्णुभोग, तीन हजार हेक्टेयर सोनम और दो हजार हेक्टेयर बासमती का अनुमानित रकबा है। इसके अलावा दक्षिणांचल क्षेत्र में तिल, अरहर, सरसों, बाजरे की खेती की जाती है। अच्छी बारिश के कारण धान का उत्पादन बेहतर होगा। - सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव, एडीओ कृषि, कोरांव