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Mansoon : बारिश से खिले किसानों के चेहरे, खरीफ की फसल को मिलेगा लाभ

Sat, 01 Jul 2023 02:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

ऐसे में अब बारिश के बाद अब किसानों को नर्सरी तैयार करने में आसानी होगी। यमुनापार में जो किसान धान की नर्सरी नहीं तैयार कर पाए हैं, उनके लिए यह बारिश बेहद फायदेमंद साबित होगी। गंगापार के किसान राम मनोहर ने बताया कि वह धान की नर्सरी पहले ही लगा चुके थे। अब बारिश के बाद आसानी से धान की रोपाई करवाएंगे।
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धान की नर्सरी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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जिले में शुक्रवार और शनिवार को दिनभर हुई बारिश से किसानों के चेहरे भी खिल गए हैं। किसानों का मानना है कि इस बारिश का फायदा खरीफ की फसल को बहुत मिलेगा। खरीफ के सीजन में धान की रोपाई के अलावा उड़द, अरहर और मोटे अनाज की बुआई भी की जाती है।

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ऐसे में अब बारिश के बाद अब किसानों को नर्सरी तैयार करने में आसानी होगी। यमुनापार में जो किसान धान की नर्सरी नहीं तैयार कर पाए हैं, उनके लिए यह बारिश बेहद फायदेमंद साबित होगी। गंगापार के किसान राम मनोहर ने बताया कि वह धान की नर्सरी पहले ही लगा चुके थे। अब बारिश के बाद आसानी से धान की रोपाई करवाएंगे।

उन्होंने बताया कि वह करीब दो हेक्टेयर खेत में धान की रोपाई करवाते हैं। शांतिपुरम के शिवपूजन मौर्य अपने खेत में सब्जी उगाते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे ही धान की रोपाई का सीजन आता है, सब्जी हटा कर धान की रोपाई करा देते हैं। इससे दोहरा लाभ मिलता है।
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बारिश किसानों के लिए खाद का काम करेगी। खरीफ की फसलों की बुआई किसान बारिश में आराम से कर सकते हैं। इस मौसम में एक बार की जोताई से खेत की मिट्टी और भी अच्छी हो जाएगी। जो किसान अभी नर्सरी नहीं डाल पाए हैं, वह अब आराम से अपनी नर्सरी तैयार कर सकते हैं। - सुभाष मौर्य, जिला कृषि अधिकारी

बासमती, गंगा कावेरी और विष्णुभोग से भरेगा धान का कटोराधान का कटोरा कहे जाने वाले कोरांव में इस बार गंगा कावेरी, बासमती, सोनम और विष्णुभोग की बुवाई ज्यादा की जाएगी। अच्छी बारिश और अनुकूल मौसम को देखते हुए किसानों के चेहरे खिल गए हैं। एक सप्ताह में धान की रोपाई शुरू हो जाएगी। यूपी और एमपी के विभिन्न जिलों में सबसे ज्यादा खपत वाले धान की पैदावार के लिए कोरांव क्षेत्र सबसे ज्यादा उपजाऊ है। यहां पैदा होने वाले चावल कई प्रदेशों में निर्यात किए जाते हैं।

कोरांव के किसान रामसजीवन ने बताया कि इस बार जून के अंतिम सप्ताह में अच्छी बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी हो गई है। इससे जल्दी ही जुताई का काम शुरू कर दिया गया है। नगई का पूरा के किसान शिवबहादुर सिंह पटेल ने बताया कि बारिश के कारण सूख रहे बेहन को संजीवनी मिल गई है। कावेरी और विष्णुभोग को पानी की आवश्यकता ज्यादा पड़ती है। ऐसे में यदि इसी तरह बारिश होती रही तो उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

समलीपुर के किसान रामायण प्रसाद द्विवेदी और बिसरी के किसान मदन कुमार सिंह ने बताया कि राजकीय गोदाम से बीज लेकर बेहन उगाया गया है। जुलाई के पहले सप्ताह में धान की रोपाई की जाएगी। इस बार ज्यादा रकबे में खेती होगी। उन्होंने कहा कि हल्की बारिश के कारण पिछले दो सालों से धान का कटोरा खाली रहता था। इस बार अच्छी बारिश के कारण चावल उत्पादन से धान का कटोरा भर जाएगा।

डीएपी और यूरिया के लिए किसान चिंतित

कोरांव में धान का रकबा ज्यादा होने के कारण डीएपी और यूरिया की खपत बढ़ जाती है। ऐसे में बड़े किसान तो पहले से खाद डंप कर लेते हैं लेकिन छोटे किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। कोरांव की सोमवारी देवी, मुन्नी देवी ओर उमराजी ने कहा कि यदि समय से खाद नहींं मिलेगी तो खेती प्रभावित होगी। उन्होंने शासन से ऐसी व्यवस्था की मांग की है, जिससे तय दामों में खाद मिले। कालाबाजारी करने वालों पर कार्रवाई हो। 

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कोरांव क्षेत्र में लगभग 50 हजार हेक्टेयर धान की रोपाई की जाएगी। इसमें 40 हजार हेक्टेयर गंगा कावेरी, पांच हजार हेक्टेयर विष्णुभोग, तीन हजार हेक्टेयर सोनम और दो हजार हेक्टेयर बासमती का अनुमानित रकबा है। इसके अलावा दक्षिणांचल क्षेत्र में तिल, अरहर, सरसों, बाजरे की खेती की जाती है। अच्छी बारिश के कारण धान का उत्पादन बेहतर होगा। - सुरेंद्र लाल श्रीवास्तव, एडीओ कृषि, कोरांव

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