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शिद्दत से इंसानियत का फर्ज निभा रहे फैजुल

Mon, 05 Dec 2016 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : allahabad
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आज के वक्त में जहां लोगों के पास अपनों के लिए वक्त नहीं है। ऐसे में अतरसइया निवासी फैजुल इंसानियत की मिसाल के रूप में सबके सामने हैं। फैजुल पिछले 17 वर्षों से लावारिस शवों को उठाकर पोस्टमार्टम तक ले जाने और फिर अंतिम संस्कार तक कराने का काम करते हैं। फैजुल नेता जाति, धर्म, समुदाय कुछ मायने नहीं रखता। उनका तो एक ही धर्म है और वो है इंसानियत।
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फैजुल 17 वर्षों में अभी तक 500 से अधिक शावों का अंतिम संस्कार करवा चुके हैं। सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि पास किलोमीटर तक फैजुल लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए पहुंचते हैं। जसरा, घूरपुर, करछना से लेकर 50 किलोमीटर तक की रेंज में पुलिस की सूचना मिलने पर फैजुल पहुंचते हैं। आधी रात हो या दिन फैजुल हमेशा तैयार रहते हैं।

फैजुल गरीबों और असहायों का इलाज करवाने में भी तत्पर रहते हैं। जैसे ही उन्हें पता चलता है कि कोई बेसहारा बीमार है तो तुरंत उसे अस्पताल में भर्ती करवाते हैं। बात सिर्फ यही तक सीमित नहीं है। भर्ती कराने के बाद उसका हाल-चाल लेने के भी वह पहुंचते हैं। जब मरीज ठीक होता है तो फैजुल को दुआएं मिलती हैं। फैजुल ने बताया कि ऐसे कई मरीज थे उन्हें वो अस्पताल लेकर गए लेकिन इलाज के बावजूद वह नहीं बचे। उनका अंतिम संस्कार भी उन्होंने करवाया।
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फैजुल की ख्वाहिश एंबुलेंस लेने की है। फैजुल कहते हैं कि अगर एंबुलेेंस की व्यवस्था हो जाएगी तो वह अपने हिसाब से काम कर सकेंगे। चाहे किसी मरीज को भर्ती कराना हो या फिर शव उठाना हो। इन सब में होने वाली समस्याओं से उन्हें छुटकारा मिल जाएगा।

फैजुल को अक्सर लोग समाज सेवा करने के लिए मना करते हैं। लोग कहते हैं कि दूसरे धर्म के लोगों की मदद मत किया करो, लेकिन फैजुल कहते हैं कि उनके लिए इंसानियत से बढ़ कर कुछ भी नहीं है। इंसानियत ही उनका मजहब है।

45 वर्ष के फैजुल बहुत ज्यादा पढ़े लिखे नहीं है लेकिन जिदंगी की क्लास में वह फर्स्ट क्लास पास है। हमेशा दूसरों की मदद के लिए तत्पर फैजुल ने अपने परिवार की जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाया है। उन्होंने अपनी पांच बहनों की शादी के बाद समाज सेवा करनी शुरू की। अब यही उनकी जिदंगी का मकसद भी है।
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