पुलिसकर्मियों की अपने घर के नजदीक वाले जिले में तैनाती पाने की ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकेगी। हाईकोर्ट ने हजारों सिपाहियों द्वारा दाखिल विशेष अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने गृह जनपद के सीमावर्ती जिलों में पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं करने के लिए सात जून 2014 को जारी शासनादेश को सही करार दिया है। सिपाहियों ने शासनादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 12 दिसंबर 2014 को एकल न्यायपीठ ने इसे खारिज कर दिया था। एकल पीठ के फैसले के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की गई।
न्यायमूर्ति राकेश तिवारी और न्यायमूर्ति दिनेश गुप्ता की खंडपीठ ने विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए एकल न्यायपीठ के फैसले को सही करार देते हुए कहा कि पुलिसकर्मी गृहजनपद के समीप तैनाती को अधिकार के रूप में नहीं मांग सकते हैं। उनकी सेवा शर्तों में भी ऐसा नहीं है। उल्लेखनीय है कि अपने गृह जनपद की सीमा से सटे जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों के ड्यूटी से गायब रहने की शिकायतें थीं। इसे लेकर डीजीपी ने प्रमुख सचिव गृह को पत्र लिखा था कि ऐसे पुलिसकर्मियों के बारे शिकायत मिली है कि वह रात में ड्यूटी छोड़कर घर चले जाते हैं। इससे प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। इस पत्र के मद्देनजर शासनादेश जारी कर सिपाहियों और हेडकांस्टेबल के लिए सीमावर्ती जिलों में तैनाती पर रोक लगा दी गई।