परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार सहायक अध्यापकों की नियुक्ति के लिए घोषित परिणाम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट में बुधवार को बहस पूरी नहीं हो सकी। पूरे मामले की बहस वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए की जा रही है।
याचिकाओं की अधिक संख्या देखते हुए वकीलों को बहस के लिए वेब लिंक पर अलग-अलग टाइम स्लॉट दिए गए हैं। याचिकाओं में घोषित परिणाम रद्द कर गलत सवालों को हटाने और उनके अंक फिर से अभ्यर्थियों को देने के बाद परिणाम जारी करने की मांग की गई है। याचिकाओं की सुनवाई 28 मई को भी होगी।
अंशू सिंह व 29 अन्य सहित आधा दर्जन याचिकाओं की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया कर रहे हैं। बुधवार को अधिवक्ता विभू राय, वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा, प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी आदि वकीलों ने अपने तर्क रखे। याची की तरफ से कहा गया कि ऐसे ही एक मामले में कोर्ट ने सरकार से जानकारी मांगी है। अधिवक्ताओं की ओर से कई न्यायिक निर्णयों को भी पेश किया गया।
आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के मामले में सुनवाई आज
69 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को दस प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं दिए जाने के मामले में दाखिल याचिका पर 28 मई को सुनवाई होगी। इस प्रकरण को लेकर शिवम कुमार पांडेय और अन्य लोगों ने याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिका पर न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की पीठ सुनवाई करेगी। याचीगण के अधिवक्ता सीमांत सिंह ने बताया कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने का आदेश 2019 का ही है।
इसके बाद 69 हजार अध्यापकों की नियुक्ति के लिए जारी गाइड लाइन में आर्थिक आधार पर आरक्षण का कोई जिक्र नहीं है, जबकि भर्ती के लिए जारी शासनादेश में कहा गया है कि सभी नियमों और शासनादेशों का पालन करते हुए भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए। याचिका में भर्ती की गाइड लाइन और इस संबंध में जारी शासनादेश को चुनौती दी गई है।