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चक्रवात से बची फसल भी तबाह

Tue, 28 Apr 2015 11:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
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जिले के गंगापार इलाके में सुबह आए चक्रवात ने भारी तबाही मचा दी। गेहूं की बची फसल भी तबाह हो गई। दर्जनों की संख्या में मकान जमीदोज हो गए। झोपड़ियां उड़कर दूर गिरीं। बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए। चक्रवात से सैकड़ों की तादाद में पेड़ भी गिरे। जगह-जगह पेड़ गिरने से तमाम गांवों का संपर्क एक-दूसरे से कट गया। बिजली के तार गिरने से गंगापार का अधिकांश हिस्सा अंधेरे में डूब गया। प्रभावित इलाकों में देर रात तक बिजली आपूर्ति ठप रही। चक्रवात, बारिश से जहां जन-धन की हानि हुई हैं, वहीं किसानों को भी जबर्दस्त नुकसान हुआ। गेहूं की फसल के साथ आम की पैदावार भी प्रभावित हुई। डीएम के निर्देश पर उपजिलाधिकारियों की अगुवाई में प्रशासन की टीमें चक्रवात से हुए नुकसान का आंकलन करने में जुट गई हैं।
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चक्रवात ने होलागढ़ के जमुनीपुर, बालाडीह, नेवाजी का पूरा, थम्हन, धानी का पूरा के अलावा सोरांव, हंडिया एवं फूलपुर तहसील के दर्जनों गांवों में भारी तबाही मचाई है। गंगापार में गेहूं की बड़े पैमाने पर पैदावार होती है। दिनों पहले हुई बारिश और आलोवृष्टि से फसल का बड़ा हिस्सा तबाह हो चुका था। किसान बची फसल की कटाई-मड़ाई में जुटे हुए थे लेकिन मंगलवार भोर में आए चक्रवात ने बची फसल को भी तबाह कर दिया। चक्रवात के कारण खेत-खलिहानों में रखा गेहूं का बोझ उड़ गया। रसी-सही कसर बारिश ने पूरी कर दी। गेहूं में पहले से ही काफी अधिक  नमी थी। तमाम किसान फसल सूखने का इंतजार कर रहे थे लेकिन चक्रवात के बाद हुई बारिश ने नुकसान का दायरा और बढ़ा दिया। ग्रामीणों के मुताबिक चक्रवात के कारण खेत-खलिहानों में रखा भूसा भी उड़कर कई किलोमीटर दूर चला गया। सिर्फ गेहूं नहीं, आम की पैदावार को भी भारी नुकसान हुआ। बारिश और ओलावृष्टि के बाद हुए सर्वें के मुताबिक आम की 30 फीसदी पैदावार नष्ट हो गई थी। चक्रवात के बाद प्रभावित इलाकों में नुकसान का दायरा कई गुना बढ़ गया। किसानों को चौतरफा नुकसान हुआ। चक्रवात से हुई तबाही के मद्देनजर डीएम भवनाथ सिंह के निर्देश पर उपजिलाधिकारियों की अगुवाई में प्रशासनिक टीमों ने प्रभावित इलाकों नुकसान के आंकलन के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। जिला कृषि अधिकारी अतींद्र सिंह ने बताया कि चक्रवात से हुए नुकसान का विभागीय स्तर पर नए सिरे से आंकलन कराया जा रहा है।

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक गंगापार में होलागढ़ से लेकर हंडिया तक साल दर साल चक्रवात से हो रही तबाही ‘उष्मा का क्षेत्र’ बनने का नतीजा है। मौसम विज्ञानी प्रो. एसएस ओझा ने बताया किकानपुर से वाराणसी तक बने फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग की वजह से लाखों पेड़ काट दिए गए और इसके बदले नए सिरे से पौधरोपण भी नहीं कराया गया। पेड़ों की संख्या कम होने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ा है। राजमार्ग के अलावा इलाके में बड़ी संख्या में संपर्क मार्गों का भी निर्माण हुआ है। कंक्रीट की सड़केें तेजी से उष्मा उत्पन्न करती हैं। साथ ही राजमार्ग पर लाखों की तादाद में छोटे-बड़े वाहनों की प्रतिदिन आवाजाही से भी ‘उष्मा का क्षेत्र’ बन रहा है। अप्रैल के अंत एवं मई की शुरुआत में प्रभावित इलाके में उच्च ताप एवं निम्न वायुदाब के कारण चक्रवात आते हैं।
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