तीन दिन बाद जब बैंक खुले तो स्वाभाविक था कि लोगों की भारी भीड़ बैंकों में उमड़ेगी। मगर हालात कुछ ज्यादा ही खराब रहे। केबल कटने से एसबीआई की शाखाओं और एटीएम पर असर पड़ा तो भीड़ बाकी बैंकाें की ओर मुड़ गई। नतीजा रहा कि लाइन पहले से लंबी हो गई और कैश के लिए लोगाें को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
शहर के 90 फीसदी एटीएम अब भी बंद पड़े हैं, ऐसे में बैंकों में भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही। मंगलवार को एसबीआई मुख्य शाखा छोड़कर सभी शाखाओं में पैसे का लेन-देन बंद होने के कारण लोगों को पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर भागना पड़ा। वहां 10 से लेकर पांच हजार तक भुगतान किया गया। कुछ शाखा प्रबंधकों ने कैश कम होने पर चार हजार तक ही भुगतान किया।
पीएनबी अधिकारी संघ के अश्वनी तिवारी ने बताया कि कैश आ जाने के बाद अब परेशानी कुछ कम हो गई है। एसबीआई के अरविंद कुमार गुप्ता ने बताया कि पैसा सभी को दिया जा रहा है। इलाहाबाद बैंक के मदन जी उपाध्याय ने बताया कि आरबीआई से पैसा आ गया है। उम्मीद है आगे से समस्या दूर होगी। डाकघर में पैसे की कमी दूर करने की हर कोशिश सफल नहीं हो सकी है। लाइन में लगे लोगों ने बताया कि यहां मात्र सिक्के का भुगतान किया जा रहा है।
अधिकांश एटीएम रहे बंद
इलाहाबाद। सरकार एवं आरबीआई के दावे के बावजूद शहर में अधिकांश एटीएम मंगलवार को भी बंद रहे। जो एटीएम खुले भी उनमें लंबी लाइन लगी रही। एसबीआई में सर्वर की परेशानी से एटीएम काम नहीं कर रहे थे। लेकिन बाकी बैंकों के एटीएम तो पहले की तरह बंद ही रहे। पीएनबी, यूनियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, आंध्रा बैंक, बिजया बैंक के एटीम में पैसा नहीं मिला। इलाहाबाद मुख्य शाखा के एटीएम से लोगों को पैसा मिलने लगा तो लोग हैरान हो गए। दरअसल, यहां नोटबंदी के बाद से बहुत कम ही पैसा मिल सका। अल्लापुर में एटीएम में तोड़फोड़ का असर दिखा। वहां के अधिकांश एटीएम बंद रहे। बैंक ऑफ इंडिया के एक एटीएम से पैसा निकल रहा था, ऐसे में वहां लंबी लाइन लगी रही। बैंक वालों के पास अब इस बात का जवाब नहीं है कि आखिर में एटीएम में लगातार तालाबंदी क्यों है, अधिकारी अलग-अलग बयान दे रहे हैं।