युवाओं की उम्मीदों पर सवार होकर केंद्र में सरकार बनाने में सफल भाजपा नेताओं के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उन्हें ही मनाने की है। भर्तियों में धांधली समेत अनेक मुद्दों को लेकर युवाआें में जबरदस्त असंतोष है और आंदोलनरत हैं। राष्ट्रीय अधिवेशन और रैली में शामिल हो रहे प्रधानमंत्री, गृहमंत्री समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों को युवाओं के विरोध और सवालों का सामना भी करना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री राजनाथ सिंह युवाओं के सीधे निशाने पर हैं। उनका कहना है कि लोक सेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पुरानी पहचान वापस दिलाने का दो साल पहले किया गया वादा ये नेता पूरा करें। युवाओं के इस मुखर विरोध को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि भाजपा के इस अधिवेशन में 2017 में होने वाला यूपी का विधानसभा चुनाव और युवा ही चर्चा के केंद्र में होंगे।
लोक सेवा आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच, अन्य संस्थानों की परीक्षाओं में धांधली का मुद्दा उठाते हुए प्रतियोगी पहले से आंदोलनरत हैं। कर्मचारी चयन आयोग कार्यालय पर प्रतियोगी कई दिनों से अनशनरत हैं। इतना ही नहीं ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा का पेपर आउट होने को लेकर परीक्षा निरस्त कराने की मांग को लेकर भी प्रतियोगी आंदोलनरत हैं। ऐसे में अधिवेशन के रूप में उन्हें बेहतर मौका मिल गया है और वे भाजपा नेताओं को घेरने की तैयारी में हैं। राजनाथ सिंह ने आयोग की भर्तियों की जांच का वादा किया था। ऐसे में उनके निशाने पर वह सीधे हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से भाजपा के व्हाट्स नंबर पर ‘सीबीआई-सीबीआई’ का मैसेज भेजा जा रहा है।
रविवार को उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय पर कैंडल और बालसन चौराहा तक मार्च की घोषणा की है। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा की ओर से भी मुंह पर पट्टी बांधकर प्रदर्शन की घोषणा की गई है। अनशनरत कर्मचारी चयन आयोग की सीपाही भर्ती के अभ्यर्थियों ने भी भाजपा नेताओं को ज्ञापन सौंपने की घोषणा की है तो ग्राम विकास अधिकारी भर्ती के अभ्यर्थियों की ओर से भी बैठक बुलाई गई है। स्टूडेंट गार्जियन फ्रंट की ओर से बेरोजगारी, महंगाई आदि मुद्दों को लेकर रविवार को इलाहाबाद बंद की घोषणा की गई है। आंदोलन के समर्थन में उन्होंने साइकिल और पैदल जुलूस भी निकाला। जुलूस में संजय तिवारी, शशिकांत त्रिपाठी, विजय मिश्र, देवमणि मिश्रा आदि शामिल रहे। एनएसयूआई की बैठक में बंद का समर्थन किया गया। संगठन की ओर से प्रधानमंत्री मानव संसाधन विकास मंत्री को काला झंडा दिखाने तथा विरोध की घोषणा की गई है। बैठक में अक्षय यादव, विकास सिंह, गौरव तिवारी आदि मौजूद रहे।
‘इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम सुनकर भी गर्व की अनुभूति होती थी। सारे देश के नौजवान इलाहाबाद विश्वविद्यालय और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की ओर देखता था। यहां की इमारत देखकर भी धन्य समझते थे।’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले चार मई को संगम की रेती पर चुनावी सभा में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की शान में यह बातें कहीं थीं। वह यहीं शांत नहीं हुए थे। कहा था, ‘मां-बेटे की सरकार ने विश्वविद्यालय की इस गरिमा का ध्यान नहीं रखा और आज वह बदहाल है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय सिर्फ यहां का नहीं पूरे देश की शान है। गंगा की गोद में कह रहा हूं कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की आन-शान वापस लाना मेरा प्राथमिक कार्य होगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय को पूरे विश्व में नाम मिले, यहां के नौजवान पूरे विश्व में डंका बजाएं। इसके लिए काम करूंगा।’
प्रधानमंत्री ही नहीं पूरी सरकार और भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता एक बार फिर दो साल बाद उसी संगम की रेती पर जुटे रहे और आज भी विश्वविद्यालय की वही बदहाली उनके सामने होगी। हां, इस बार सवालों में मां-बेटे की सरकार नहीं स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यहां के लोगों से किया गया उनका वादा है। संगम नगरी के वासियों और युवाओं का प्रधानमंत्री के सामने सबसे पहला सवाल तो यही है कि आखिर विश्वविद्यालय में स्थाई कुलपति की नियुक्ति में डेढ़ साल क्यों लग गए। विगत दो वर्षों में ही देखें तो विश्वविद्यालय को मात्र वाई-फाई परिसर का दर्जा मिल पाया है। केंद्र सरकार की ओर इसे पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया था। इसके विपरीत परिसर को दाग लगाने तथा अराजकता वाली घटनाआें की लंबी फेहरिस्त है।
इसके अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद केशव प्रसाद मौर्य ने स्वयं कई बार विश्वविद्यालय के लिए इंजीनियरिंग, मेडिकल और एग्रीकल्चर फैकेल्टी का मुद्दा उठाया। विश्वविद्यालय के साथ उनकी ओर से भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय में इसका प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। विद्यार्थियों की हॉस्टल की समस्या वैसे ही बनी हुई है। ऐसे में शहरियों में उम्मीद जगी है कि दो साल पहले किया गया वादा पूरा करने की दिशा में प्रधानमंत्री कोई बड़ी घोषणा जरूर करेंगे। विश्वविद्यालय के मिनिस्टीरियल एंड टेक्निकल स्टॉफ यूनियन की ओर से विज्ञप्ति जारी कर नई फैकेल्टी केसाथ कई अन्य मुद्दे भी उठाए गए हैं। विश्वविद्यालय के छात्र कबीर आजाद मिश्र ने भी उम्मीद जगाई है कि विश्वविद्यालय की पुरानी पहचान वापस दिलाने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से पहल की जाएगी।
प्रधानमंत्री से वार्ता के लिए समय मांगने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष ऋचा सिंह ने अब उन्हें खुला पत्र लिखा है। उन्होंने विश्वविद्यालय में व्याप्त वित्तीय अनियमितता, नियुक्तियों में गड़बड़ी, प्रवेश परीक्षा में अव्यवस्था आदि मुद्दे उठाते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। ऋचा परिसर में छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया है।