खुल्दाबाद स्थित बाल गृह बालिका में बीते 30 दिनों में चार शिशुओं की मौत हो चुकी है। बाल कल्याण समिति की ओर से केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) मुख्यालय को पत्र लिखकर मामले से अवगत कराया गया है। अचानक शिशुओं की मौत पर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इनकी मौत कैसे हो गई। जबकि शिशुओं की रूटीन जांच भी होती है। बाल गृह बालिका में नवजात से लेकर 10 वर्ष तक की लगभग 63 बच्चियां हैं।
24 नवंबर की रात यहां करीब दो माह की बच्ची की अचानक मौत हो गई। हैरानी की बात है कि इस बच्ची को अगले सप्ताह बंगलूरू का एक परिवार गोद लेने वाला था। वहीं, 27 नवंबर को पांच माह की एक और बच्ची की मौत हो गई। इसके बाद 17 और फिर 23 दिसंबर की दो और बच्चियों की मौत हो गई। बताया गया कि इनमें से एक और बच्ची को गोद देने की प्रक्रिया चल रही थी। बाल गृह बालिका में आने वाली नवजात बच्चियों का चेकअप करने के लिए सीएमओ स्तर पर तैनात डॉक्टर की टीम रोजाना आती है। इसके बावजूद टीम बच्चियों की बीमारियों को पकड़ नहीं सकी। इसके अलावा बच्चियों की देखरेख को लेकर और भी कई सारी सुविधाएं हैं। इनकी मौत को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
प्री-मेच्योर और वजन कम होने से हुई मौत
बाल राजकीय शिशु गृह की अधीक्षक डॉ. प्रज्ञा सिंह ने बताया कि यहां आने वाले हर शिशु का पूरा ख्याल रखा जाता है। डॉक्टर की टीम लगी हुई है। बीते 30 दिनों में हुई बच्चियों की मौत में प्री-मेच्योर और वजन कम होना सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा यहां पर नवजात को मां का दूध नहीं मिलता है। कई बार इसकी वजह से भी दिक्कत होती है।