इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किराएदार संग मुकदमों का हवाला देकर कर्ज अदायगी से कर्जदार नहीं बच सकता। ऋण से जुड़े मामलों में सुनवाई का अधिकार ऋण वसूली प्राधिकरण (डीआरटी) को है सिविल कोर्ट को नहीं। सिविल कोर्ट के स्थगन आदेश के आधार पर बैंक की ऋण वसूली पर रोक अवैधानिक है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सर्राफ और न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरी की खंडपीठ ने एक्सिस बैंक हापुड़ की ओर से दाखिल याचिका निस्तारित करते हुए दिया है।
याचिका के मुताबिक, बैंक ने एक कर्जदार की संपत्ति गिरवी रखी थी। कर्ज न चुकाने पर बैंक ने कब्जा दिलाने के लिए एसडीएम धौलाना हापुड़ को सरफेसी एक्ट के तहत अर्जी दी लेकिन उसी बीच संपत्ति में रह रहे किरायेदार ने सिविल कोर्ट से स्थगन आदेश हासिल कर लिया।
कोर्ट ने कहा कि सिविल कोर्ट का यह आदेश मान्य नहीं है, क्योंकि ऐसे मामले देखने का अधिकार सिर्फ डीआरटी को है। अगर डीआरटी स्थगन आदेश देता है तो उसका पालन किया जाए, वरना आठ हफ्ते के भीतर बैंक को संपत्ति पर कब्जा दिलाया जाए।