सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा है कि सभी को सस्ता और शीघ्र न्याय मिलना चाहिए। आज तकरीबन सत्तर फीसदी मुकदमें, सरकार के होते है, ऐसे मुकदमों की संख्या कम होगी, तभी आम लोगों के मुकदमे सुने जा सकेंगे। दुुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में न्यायपालिका के समक्ष मुकदमों केबोझ से निपटना सबसे बड़ी चुनौती है। इसी तरह योग्य, सत्यनिष्ठ, ईमानदार और शिष्ट जजों की नियुक्ति भी जरूरी है।
पंडित कन्हैया लाल मिश्र मेमोरियल कमेटी की ओर से ‘भारतीय जनतंत्र में न्यायपालिका के समक्ष चुनोतियाँ’ विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि वरिष्ठ न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा कि बार, बेंच की मां है, जैसी बार होगी, बेंच भी वैसी होगी। न्यायपालिका की गरिमा को कायम रखते हुए बार और बेंच को मिलकर काम करना चाहिए। योग्य और सशक्त बार के लिए मेडिकल, इंजीनियरिंग की तरह कानून की पढ़ाई के लिए मानक के अनुरूप लॉ कॉलेज की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार के आम बजट की तुलना में कोर्ट को समुद्र में एक बूंद की तरह बजट दिया जाता है। न्यायपालिका का बजट बढ़ाकर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने से आम लोगों को न्याय देने में आ रही दिक्कतें दूर हो सकती हैं। सरकार को कोर्ट फीस की आय कोर्ट में ही खर्च करनी चाहिए। संसद के नए कानून एवं कोर्ट के विधि सिद्धांतों से भविष्य में चुनौतियाँ बढ़ेंगीं। इससे पहले उन्होंने पंडित कन्हैया लाल मिश्र को ईश्वरीय उत्पत्ति मानते हुए विधिक इतिहास में उनके योगदान को रेखांकित किया।
बतौर अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने कहा, बेहतर सरकार चुनने के लिए हमें अवश्य वोट डालना चाहिए। चुनी हुई सरकार, संसद तथा न्यायपालिका के बीच ‘चेक एवं बैलेन्स’ के लिए स्वतंत्र और मजबूत न्यायपालिका का होना जरूरी है। कोर्ट, सरकार या संसद नहीं अपितु संविधान के प्रति जवाबदेह है। न्यायपालिका पर संविधान के संरक्षण का दायित्व है।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति डीबी भोसले ने कहा कि न्यायपालिका पर मुकदमों का बोझ है। लोगो का कोर्ट पर भरोसा है। पुराने मुकदमे निपटाने के लिए नए मुकदमों के दाखिले को रोका नहीं जा सकता है। वकीलों का सहयोग नही मिल रहा। हाईकोर्ट में 9.13 लाख तथा अधीनस्थ अदालतों में 76 लाख मुकदमे विचाराधीन हैं। ग्लोबल ट्रेडिंग बढ़ रही है। हमें मिडिएसन के जरिए मुकदमें निपटाने में सहयोग करना चाहिए। समय से मुकदमे की सुनवाई न हो पाना बड़ी चुनौती है।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने कहा, देश में श्रेष्ठ शासन प्रणाली है जिसमें शक्तियों के विक्रेंद्रीकरण का सिद्धांत लागू है। लोकतंत्र के लिए मीडिया की स्वतंत्रता जरूरी है। संविधान के मूलभूत ढांचे के खिलाफ किसी भी कानून को रद करने का अधिकार न्यायपालिका को है। वरिष्ठ अधिवक्ता वीके श्रीवास्तव ने भी पंडित कन्हैयालाल मिश्र को याद किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता एनसी राजवंशी ने अतिथियों का स्वागत, राकेश पांडेय ने संचालन तथा समिति के सचिव सन्तोष कुमार त्रिपाठी ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। स्वर्गीय मिश्र के बेटे एवं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति एपी मिश्र ने शाल ओढ़ाने के बाद अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल, न्यायमूर्ति विक्त्रस्म नाथ सहित अनेक न्यायमूर्ति, समिति के सदस्य बीडी पांडेय,जेबी सिंह, मनोज निगम, आशीष मिश्र, सौम्या श्रीवास्तव, एबी शुक्ल, सचिन कुमार,अखिलेश मिश्र मौजूद थे।